हिंगोली के औंढा स्थित एक सरकारी स्कूल में छात्रों को भोजन में 6 महीने पुराने एक्सपायर्ड मसाले दिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्कूल की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सरकार को घेरा है।
- हिंगोली के औंढा स्थित सरकारी स्कूल में फरवरी से एक्सपायर्ड मसाले मिलने का दावा।
- CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत किया निरीक्षण।
- स्कूल में पीने के पानी की समस्या और शौचालयों में पानी की भारी कमी पाई गई।
- 87 छात्रों के लिए केवल दो कमरों की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे का भारी अभाव।
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी स्कूल में पढ़ रहे मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। CJP (Citizens for Justice and Peace) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत औंढा स्थित एक सरकारी स्कूल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन में ऐसे मसालों का उपयोग किया जा रहा है, जिनकी एक्सपायरी डेट फरवरी 2026 में ही समाप्त हो चुकी है।
अभिजीत दिपके ने मीडिया को मसाले के पैकेट दिखाते हुए कहा कि ये पैकेट पिछले छह महीनों से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने भावुक और तीखे स्वर में सवाल किया, "क्या मंत्रियों के बच्चों को भी यही एक्सपायर्ड खाना खिलाया जाएगा?" उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के बच्चों को जानबूझकर खराब गुणवत्ता वाला भोजन दिया जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हो सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और स्वच्छता सीधे तौर पर बच्चों के पोषण और शिक्षा के प्रति उनके नजरिए को प्रभावित करती है। यदि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो यह न केवल स्वास्थ्य संकट पैदा करेगा बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को एक्सपायर्ड भोजन देना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
निरीक्षण के दौरान केवल भोजन ही नहीं, बल्कि स्कूल के बुनियादी ढांचे की भी भयावह स्थिति सामने आई है। दिपके ने बताया कि स्कूल में वाटर फिल्टर तो लगा है, लेकिन वह काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण छात्र बोरवेल के असुरक्षित पानी का सेवन करने को मजबूर हैं। इसके अलावा, स्कूल के शौचालयों में पानी की भारी कमी है, जिससे स्वच्छता का स्तर शून्य हो गया है।
स्कूल की क्षमता और वर्तमान स्थिति के बीच एक बड़ा अंतर देखा गया। जहाँ स्कूल में 87 छात्रों के लिए चार कक्षाओं की स्वीकृति है, वहीं वर्तमान में केवल दो कमरों में ही पढ़ाई संचालित की जा रही है। दिपके ने कहा कि छात्रों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें न तो शुद्ध भोजन मिल रहा है और न ही बुनियादी सुविधाएँ।
Frequently Asked Questions
1. अभिजीत दिपके का 'स्कूल ठीक करो' अभियान क्या है?
यह एक अभियान है जिसका उद्देश्य ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
2. हिंगोली स्कूल मामले में मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोप एक्सपायर्ड मसालों का उपयोग, पीने के पानी की कमी और कक्षाओं की अपर्याप्त संख्या से संबंधित हैं।