1938 के दौरान निज़ाम के शासन में छात्रों ने 'वंदे मातरम' को केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का मंत्र मानकर गाया। इस देशभक्ति की लहर ने पूरे हैदराबाद राज्य में क्रांति की आग जला दी थी।
- 1938 में Osmania University के छात्रों ने 'वंदे मातरम' गाने के कारण भारी विरोध का सामना किया।
- निज़ाम सरकार ने इसे धार्मिक नहीं बल्कि देशभक्ति का प्रतीक मानकर प्रतिबंधित किया था।
- इस आंदोलन में पी.वी. नरसिम्हा राव जैसे भविष्य के नेता भी शामिल थे।
- सैकड़ों छात्रों को निष्कासित किया गया, लेकिन राष्ट्रवाद की भावना नहीं थमी।
हैदराबाद की Osmania University के 'B' हॉस्टल की दीवारें आज भले ही जर्जर हो चुकी हों, लेकिन इनके गलियारों में गूंजने वाले 'वंदे मातरम' के स्वर आज भी इतिहास के पन्नों में जीवित हैं। 1938 की सर्दियों में, जब छात्र रमजान की छुट्टियों के बाद वापस लौटे, तो प्रार्थना कक्षों में गूंजने वाले इस मंत्र ने निज़ाम के शासन की नींव हिला दी थी।
यह केवल एक गीत नहीं था; छात्रों के लिए यह एक 'मंत्र' था। निज़ाम सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि वे इसे धार्मिक विषय के बजाय सीधे तौर पर राष्ट्रवाद और देशभक्ति से प्रेरित देख रहे थे। उस दौर में निज़ाम का शासन अंग्रेजों से भी अधिक सख्त था, जिससे इस विरोध को और भी साहसी बना देता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक छात्र विरोध नहीं थी, बल्कि यह हैदराबाद रियासत में राजनीतिक चेतना के उदय का प्रतीक थी। इसने दिखाया कि कैसे शिक्षा संस्थान सत्ता के विरुद्ध प्रतिरोध के केंद्र बन सकते हैं।
वंदे मातरम का आह्वान उस समय निज़ाम की सत्ता के विरुद्ध एक सीधा वैचारिक युद्ध था।
इस आंदोलन की लहर केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं थी। वारंगल में 17 वर्षीय P.V. Narasimha Rao (जो बाद में भारत के प्रधानमंत्री बने) को वंदे मातरम गाने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था। इसी तरह, सिकंदराबाद में लड्डीपल्ली अंजय्या को कोड़े मारे गए और जेल भेजा गया। करीमनगर के महादेव सिंह ठाकुर को भी इसी कारण निष्कासित किया गया था।
आंदोलन की तीव्रता तब और बढ़ गई जब औरंगाबाद गवर्नमेंट इंटरमीडिएट कॉलेज के शिक्षक Govindbhai Shroff को उनके 'राष्ट्रविरोधी' विचारों के कारण बर्खास्त कर दिया गया। उनके इस कदम ने छात्रों के भीतर क्रांति की ज्वाला को और भड़का दिया।
छात्रों पर कार्रवाई का विवरण
| संस्थान | निष्कासित छात्रों की संख्या |
|---|---|
| Osmania University College | 350 |
| Gulbarga College | 310 |
| City College | 70 |
| Mahboobnagar High School | 120 |
निज़ाम सरकार ने इस विरोध को कुचलने के लिए 'पब्लिक सेफ्टी रेगुलेशन' का सहारा लिया। जहाँ एक ओर छात्र 'वंदे मातरम' गा रहे थे, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक तौर पर 'असफिया गीत' (Do Al Men Riya Sabe) गाने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका अर्थ था 'निज़ाम की उम्र लंबी हो'।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: निज़ाम सरकार ने वंदे मातरम पर प्रतिबंध क्यों लगाया था?
उत्तर: सरकार इसे धार्मिक गीत के बजाय राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला एक राजनीतिक हथियार मानती थी।
प्रश्न 2: इस आंदोलन में कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?
उत्तर: पी.वी. नरसिम्हा राव, रामचंद्र राव और सरोजिनी नायडू के पुत्र जयसूर्या नायडू ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।