कोल्लेरू झील के आसपास रहने वाले किसानों और मछुआरों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए 'वॉइस ऑफ कोल्लेरू' नामक संगठन बनाया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि झील के आसपास के 1.61 लाख एकड़ क्षेत्र को आर्द्रभूमि (wetland) घोषित करने से उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

  • 'वॉइस ऑफ कोल्लेरू' संगठन का गठन स्थानीय किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है।
  • स्थानीय निवासियों का विरोध 1.61 लाख एकड़ क्षेत्र को आर्द्रभूमि (wetland) के रूप में वर्गीकृत करने के खिलाफ है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो महीने के भीतर आर्द्रभूमि की सीमा का सीमांकन करने का निर्देश दिया है।

आंध्र प्रदेश के कोल्लेरू झील क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों, एक्वाकल्चर (मछली पालन) और कृषि किसानों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक नया कल्याणकारी समाज, 'वॉइस ऑफ कोल्लेरू' (Kolleru Volunteers Organisation for Inclusive Conservation and Empowerment) गठित किया है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य झील से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों से प्रभावित लोगों को एक मंच प्रदान करना और उनके अधिकारों को सुरक्षित करना है।

इस संगठन के अध्यक्ष चै. शिवाजी राजू ने बताया कि यह समूह जागरूकता बैठकें आयोजित करेगा, जन प्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास करेगा और आर्द्रभूमि की सीमाओं के सीमांकन से जुड़े कानूनी पहलुओं का गहन अध्ययन करेगा। संगठन का लक्ष्य राज्य और केंद्र सरकारों के साथ समन्वय स्थापित करना है ताकि स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी न हो।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

कोल्लेरू झील के आसपास के क्षेत्रों में एलुरु, कैकालुरु, उंडी, गुडीवाडा, उंगुतुरु और डेंडुलुरु मंडल शामिल हैं, जहाँ लाखों लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और मछली पालन पर निर्भर हैं। BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यदि सरकार कोल्लेरू के आसपास के पूरे 1,61,000 एकड़ क्षेत्र को आर्द्रभूमि के रूप में वर्गीकृत करती है, तो यह क्षेत्र के विकास कार्यों को पूरी तरह से रोक सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि कोल्लेरू का वास्तविक विस्तार केवल 64,000 एकड़ है, और इसके बाहर के क्षेत्रों को आर्द्रभूमि के दायरे में लाना अन्यायपूर्ण होगा।

संगठन के सचिव गंगाधरम और अन्य नेताओं, जिनमें रामलिंग राजू और बोसे राजू शामिल हैं, ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद स्थिति संवेदनशील हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक रिट याचिका के जवाब में दो महीने के भीतर आर्द्रभूमि की सीमाओं की पहचान करने और उनका सीमांकन पूरा करने का आदेश दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कोल्लेरू झील भारत की सबसे महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है। हालांकि, पारिस्थितिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच का संघर्ष दशकों पुराना है। हाल के वर्षों में, पर्यावरण नियमों के कड़े होने से उन समुदायों पर दबाव बढ़ा है जो सदियों से इस पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सामंजस्य बिठाकर रह रहे हैं।

Frequently Asked Questions

1. 'वॉइस ऑफ कोल्लेरू' का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कोल्लेरू झील के आसपास रहने वाले किसानों और मछुआरों के अधिकारों की रक्षा करना और आर्द्रभूमि सीमांकन के कानूनी पहलुओं का अध्ययन करना है।

2. स्थानीय लोग किस बात से डरे हुए हैं?
लोग इस बात से चिंतित हैं कि यदि 1.61 लाख एकड़ क्षेत्र को आर्द्रभूमि घोषित कर दिया गया, तो उनके कृषि और मछली पालन के अधिकार समाप्त हो जाएंगे और विकास कार्य रुक जाएंगे।

Did You Know?: कोल्लेरू झील क्षेत्र में लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और एक्वाकल्चर के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं।