अरनमुला उथ्रिट्ठी नौका दौड़ में मेलुकरा पल्लियोडम ने ए-बैच में जीत हासिल की, जबकि कोत्थथूर-कैथाकोडी पल्लियोडम ने बी-बैच में लगातार तीसरी जीत के साथ हैट्रिक बनाई। पम्पा नदी के तट पर आयोजित इस भव्य उत्सव में परंपरा और रोमांच का संगम देखने को मिला।

  • मेलुकरा पल्लियोडम ने ए-बैच फाइनल में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • कोत्थथूर-कैथाकोडी पल्लियोडम ने बी-बैच में लगातार तीसरी जीत (हैट्रिक) दर्ज की।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया।

केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक, अरनमुला उथ्रिट्ठी नौका दौड़ रविवार को पम्पा नदी के उफान के साथ अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। यह केवल एक दौड़ नहीं थी, बल्कि भक्ति, तालबद्ध ऊर्जा और परंपरा का एक जीवंत उत्सव था। नदी के किनारे उमड़ी भारी भीड़ के बीच, सैकड़ों चप्पूओं की एक साथ गूँज ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ए-बैच और बी-बैच के परिणाम

प्रतिष्ठित ए-बैच फाइनल में, एक कड़े मुकाबले के बाद मेलुकरा पल्लियोडम ने शानदार जीत दर्ज की। उनके बाद कोइप्राम पल्लियोडम दूसरे और एडसेरिमाला ईस्ट पल्लियोडम तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, मल्लाप्पुझाशेरी पल्लियोडम चौथे स्थान पर रहा।

दूसरी ओर, बी-बैच में कोत्थथूर-कैथाकोडी पल्लियोडम का दबदबा कायम रहा। 2024 और 2025 में जीत दर्ज करने के बाद, 2026 में भी उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी लगातार तीसरी जीत की 'हैट्रिक' पूरी की। उनके बाद वनमझी पल्लियोडम दूसरे, थोट्टप्पुझासेरी पल्लियोडम तीसरे और मंगलम पल्लियोडम चौथे स्थान पर रहे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, अरनमुला नौका दौड़ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह केरल के सामाजिक ताने-बाने और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। पल्लियोडम (पारंपरिक नौकाओं) की यह प्रतिस्पर्धा स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अरनमुला की यह नौका दौड़ केरल की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस वर्ष के उत्सव में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उद्घाटन किया, जबकि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पल्लियोडम सेवा संगम के अध्यक्ष के.वी. सांबसिवन ने की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अरनमुला उथ्रिट्ठी नौका दौड़ पम्पा नदी में आयोजित होने वाला एक पवित्र उत्सव है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह पारंपरिक 'पल्लियोडम' नौकाओं की शक्ति और नाविकों के अनुशासन का परीक्षण करती है।

Did You Know?: इन नौकाओं को चलाने वाले नाविकों का तालमेल इतना सटीक होता है कि वे एक ही लय में 'वंचिपाट्टू' (नौका गीत) गाते हुए चप्पू चलाते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बी-बैच में किसने जीत हासिल की?
उत्तर: कोत्थथूर-कैथाकोडी पल्लियोडम ने बी-बैच में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

प्रश्न 2: इस कार्यक्रम का उद्घाटन किसने किया?
उत्तर: कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा किया गया था।