उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुओं के हमलों ने भारी तबाही मचाई है, जहाँ केवल अगस्त महीने में 4 लोगों की जान जा चुकी है। दहशत का आलम यह है कि ग्रामीण अब अपने घरों को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

  • अगस्त महीने में मुरादाबाद के अलग-अलग गांवों में 4 लोगों की मौत।
  • बहापुर बलिया गांव के निवासी सुरक्षा की कमी के कारण पलायन करने की तैयारी में।
  • वन विभाग ने इस महीने अब तक 10 तेंदुओं को पकड़ा है।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा तहसील में स्थित बहापुर बलिया और लालापुर पीपलसना गांवों में इस समय मौत का खौफ पसरा हुआ है। पिछले चार हफ्तों के भीतर तेंदुओं के हमलों में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जिसमें से तीन मौतें अकेले बहापुर बलिया गांव में हुई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर गांव छोड़ने का निर्णय लेने की चेतावनी दी है।

ताजा घटना शनिवार की है, जब 35 वर्षीय किसान जगरज सिंह सैनी को तेंदुआ उनके घर के आंगन से ही घसीटकर ले गया। वह आंगन में सो रहे थे जब तेंदुए ने उनकी गर्दन दबोच ली। अगले दिन उनका शव पास के एक खेत में मिला। ग्रामीणों का कहना है कि पहले हमले केवल खेतों तक सीमित थे, लेकिन अब जंगली जानवर सीधे घरों के भीतर घुस रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल वन्यजीव संघर्ष नहीं है, बल्कि मानव-वन्यजीव गलियारों (corridors) के सिमटने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बुनियादी ढांचे की कमी का परिणाम है। जब स्थानीय लोग पलायन की बात करते हैं, तो यह राज्य प्रशासन की विफलता और वन्यजीव प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करता है।

"जब वन्यजीव बस्तियों के इतने करीब आ जाते हैं, तो यह पारिस्थितिक असंतुलन और शिकार की कमी का संकेत होता है, जिससे जानवर इंसानों को आसान शिकार मानने लगते हैं।"

ग्रामीणों और वन अधिकारियों का संदेह है कि इन सभी हमलों के पीछे एक ही 'नरभक्षी' तेंदुआ हो सकता है। गांव के प्रधान नरेश कुमार ने मांग की है कि इस तेंदुए को 'man-eater' घोषित कर 'shoot-on-sight' (देखते ही गोली मारने) का आदेश जारी किया जाए। साथ ही, उन्होंने गांव में एक स्थायी वन चौकी की स्थापना की मांग की है ताकि 24 घंटे निगरानी रखी जा सके।

घटनाक्रम पर नजर डालें तो 18 अगस्त को 55 वर्षीय ब्रहमो देवी और 25 अगस्त को 45 वर्षीय मिथिलेश देवी की मौत हुई। इससे पहले 3 अगस्त को लालापुर पीपलसना गांव में संतोष देवी की जान गई थी। इन हमलों में छह अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

दूसरी ओर, मुरादाबाद के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) विनय कुमार सिंह का कहना है कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस महीने 10 तेंदुओं को पकड़ा गया है और पिंजरे व जाल लगाए गए हैं। हालांकि, ग्रामीणों के पलायन के निर्णय के बारे में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

क्या आप जानते हैं?: तेंदुए रात में इंसानों की तुलना में छह गुना बेहतर देख सकते हैं, जो उन्हें अंधेरे में घात लगाकर हमला करने में माहिर बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. मुरादाबाद में अब तक कितने लोग मारे गए हैं?
अगस्त महीने में तेंदुओं के हमलों में कुल 4 लोगों की मौत हुई है और 6 लोग घायल हुए हैं।

2. ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीण चाहते हैं कि तेंदुए को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने का आदेश दिया जाए और गांव में एक स्थायी वन चौकी बनाई जाए।