गृह मंत्रालय द्वारा साल 2019 में शुरू किए गए प्रतिष्ठित 'सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार' के पहले विजेता की घोषणा इस साल 31 अक्टूबर को होने की पूरी संभावना है। पिछले सात वर्षों में हर साल सैकड़ों नामांकन मिलने के बावजूद, किसी भी उम्मीदवार को इस उच्च सम्मान के योग्य नहीं पाया गया था।

  • सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार के पहले विजेता की घोषणा इस साल 31 अक्टूबर को होने की संभावना है।
  • साल 2019 में स्थापित इस पुरस्कार के लिए अब तक किसी भी उम्मीदवार को उपयुक्त नहीं पाया गया था।
  • यह पुरस्कार पद्म विभूषण के समकक्ष माना जाता है, जिसमें स्वर्ण और चांदी से निर्मित कमल के पत्ते के आकार का पदक दिया जाता है।

गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा सात साल पहले स्थापित किया गया देश का प्रतिष्ठित 'सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार' आखिरकार इस साल अपने पहले विजेता को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस पुरस्कार की घोषणा 31 अक्टूबर को की जाएगी, जो भारत के 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के दो साल लंबे देशव्यापी समारोहों के समापन के अवसर पर होगी।

सितंबर 2019 में इस पुरस्कार की स्थापना के बाद से हर साल 100 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए, लेकिन अब तक किसी भी विजेता की घोषणा नहीं की गई थी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि चयन समिति ने पिछले वर्षों में आए किसी भी आवेदन को इस सर्वोच्च सम्मान के "योग्य" या "अनुकूल" नहीं पाया था, जिसके कारण यह पुरस्कार अब तक लंबित था। हालांकि, इस साल सरदार पटेल की 150वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर इस गतिरोध को तोड़ने की तैयारी कर ली गई है।

इस वर्ष के पुरस्कार चक्र के लिए नामांकन प्रक्रिया 1 जून से 31 जुलाई तक खुली थी, जिसमें 150 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय सचिवों को पत्र लिखकर इसके लिए योग्य नाम भेजने का आग्रह किया था। सूत्रों के मुताबिक, यह पुरस्कार देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' के समकक्ष माना जाता है और इस बार दो या तीन विजेताओं को यह सम्मान दिया जा सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर इस पुरस्कार की शुरुआत करना राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। भारत जैसे विविध देश में, राष्ट्रीय एकता के लिए चुपचाप काम करने वाले नायकों को पहचानना समाज में सकारात्मक संदेश देता है और देश की अखंडता को मजबूत करता है।

इस पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कड़ी और पारदर्शी है। प्रधानमंत्री द्वारा गठित चयन समिति में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, राष्ट्रपति के सचिव, गृह सचिव और प्रधानमंत्री द्वारा नामित तीन-चार प्रतिष्ठित नागरिक शामिल होते हैं। समिति द्वारा नाम तय किए जाने के बाद, जांच एजेंसियों द्वारा उम्मीदवारों का कड़ा सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाता है ताकि उनके चरित्र और पृष्ठभूमि पर कोई दाग न हो।

"सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार देश के नागरिक सम्मानों में एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है, जो विशेष रूप से राष्ट्रीय अखंडता के लिए किए गए निस्वार्थ प्रयासों को मान्यता देता है।" — वरिष्ठ नीति विश्लेषक

इस पुरस्कार के तहत विजेता को एक पदक और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है, लेकिन इसके साथ कोई मौद्रिक अनुदान या नकद राशि नहीं जुड़ी होती है। यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता है, केवल अत्यंत दुर्लभ और असाधारण मामलों को छोड़कर। पदक सोने और चांदी से बना होता है, जो कमल के पत्ते के आकार का होता है। इसके एक तरफ सरदार पटेल का चित्र और दूसरी तरफ राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) अंकित होता है।

विशेषतासरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कारपद्म विभूषण
स्थापना वर्ष20191954
मुख्य क्षेत्रराष्ट्रीय एकता और अखंडताकिसी भी क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट सेवा
नकद पुरस्कारकोई नहींकोई नहीं
मरणोपरांत सम्मानकेवल अत्यंत दुर्लभ मामलों मेंअनुमति है
क्या आप जानते हैं?: सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार का पदक सोने और चांदी से निर्मित कमल के पत्ते के आकार का होता है, जिसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक डिजाइनों में से एक माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: 2019 से अब तक यह पुरस्कार किसी को क्यों नहीं दिया गया?
A1: हर साल 100 से अधिक नामांकन मिलने के बावजूद, चयन समिति को कोई भी उम्मीदवार इस सम्मान के कड़े और उच्च मानकों के अनुरूप योग्य नहीं मिला था।

Q2: इस पुरस्कार के तहत विजेता को क्या मिलता है?
A2: विजेता को सोने और चांदी से बना एक विशेष पदक और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है, हालांकि इसमें कोई नकद राशि शामिल नहीं होती है।