भारत के पास स्वदेशी रक्षा क्षमता है, लेकिन नौकरशाही की देरी और संस्थागत खामियों के कारण अर्जुन टैंक जैसे महत्वपूर्ण हथियार समय पर सेना तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।

  • भारत के रक्षा निर्यात में 25 गुना वृद्धि हुई है, लेकिन घरेलू खरीद में देरी जारी है।
  • अर्जुन Mk 1A टैंक की डिलीवरी में पांच साल की देरी ने परिचालन क्षमता को प्रभावित किया है।
  • नौकरशाही के बदलावों और कॉर्पोरेटाइजेशन के कारण महत्वपूर्ण पुर्जों की खरीद बाधित हुई है।

भारत रक्षा क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश ने ₹1.54 ट्रिलियन मूल्य के रक्षा उपकरण बनाए हैं और निर्यात में 25 गुना की वृद्धि देखी है। हालांकि, इस चमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है: संस्थागत विफलता। भारत के पास क्षमता है, लेकिन सिस्टम की सुस्ती हमारे सबसे घातक हथियारों की धार कुंद कर रही है।

अर्जुन टैंक: क्षमता बनाम कार्यान्वयन

अर्जुन Mk 1A टैंक केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। 2014 की एक CAG रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन टैंक ने रूसी T-90 जैसे आयातित टैंकों की तुलना में मारक क्षमता, गतिशीलता और उत्तरजीविता के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। DRDO ने इन टैंकों को निर्धारित समय से पहले विकसित किया था, लेकिन सेना के परीक्षण और खरीद प्रक्रिया में वर्षों की देरी ने इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह देरी केवल कागजी नहीं है, बल्कि सामरिक रूप से खतरनाक है। राजस्थान सीमा के पास पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए, अर्जुन टैंक पर तैनात होने वाली SAMHO मिसाइल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। SAMHO एक ऐसी मिसाइल है जो टैंक की मुख्य बंदूक से दागी जा सकती है और इसकी मारक क्षमता 5 किमी तक है, जो सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

DRDO के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि सेना के परीक्षण चक्र ने विकास चक्र से भी अधिक समय ले लिया, जो एक अवरोधक प्रणाली का संकेत है।

देरी का एक मुख्य कारण 2020 के रक्षा अधिग्रहण प्रोटोकॉल में स्वदेशी सामग्री की आवश्यकता को 40% से बढ़ाकर 50% करना था। हालांकि यह 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए अच्छा था, लेकिन इसने आयातित पुर्जों की लागत बढ़ा दी और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया। इसके अलावा, ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के कॉर्पोरेटाइजेशन ने पुराने खरीद आदेशों को अमान्य कर दिया, जिससे जर्मनी की MTU जैसी कंपनियों से महत्वपूर्ण 'पावर पैक' मंगवाने में बाधा आई।

क्या आप जानते हैं?: अर्जुन टैंक की SAMHO मिसाइल को अलग से लॉन्चर की आवश्यकता नहीं होती; इसे सीधे टैंक की 120mm बंदूक से दागा जा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अर्जुन टैंक की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य रूप से नौकरशाही संबंधी बदलाव, स्वदेशी सामग्री के नियमों में बदलाव और ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के कॉर्पोरेटाइजेशन के कारण खरीद प्रक्रिया में बाधा आई है।

प्रश्न 2: SAMHO मिसाइल क्या है?
उत्तर: यह एक टैंक-लॉन्च मिसाइल है जिसे अर्जुन टैंक की मुख्य बंदूक से दागा जा सकता है, जिसकी रेंज 1.5 से 5 किमी है।