कन्नड़ विकास प्राधिकरण (KDA) के अध्यक्ष पुरुषोत्तम बिलिमले ने तटीय कर्नाटक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं के लिए स्थायी स्मारकों की कमी पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मोलहल्ली शिव राव और श्रीनिवास मल्या जैसे दिग्गजों के योगदान को याद करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

  • केडीए अध्यक्ष ने तटीय क्षेत्र के विकासकों के लिए स्थायी स्मारकों की मांग की।
  • मोलहल्ली शिव राव और श्रीनिवास मल्या के योगदान को भुला दिया गया है।
  • शिव राव ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए सहकारी क्षेत्र का उपयोग किया।
  • श्रीनिवास मल्या ने हवाई अड्डे और एनआईटी-के (NIT-K) की स्थापना में मदद की।

मंगलुरु में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान, कन्नड़ विकास प्राधिकरण (KDA) के अध्यक्ष पुरुषोत्तम बिलिमले ने तटीय कर्नाटक के निर्माण में योगदान देने वाले महान नेताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि क्षेत्र के विकास के स्तंभ माने जाने वाले नेताओं के लिए कोई स्थायी स्मारक या स्मारक कार्य नहीं किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान अरविंद चोकडाडी द्वारा लिखित पुस्तक “मोगेदस्तु मोलेयुवा मोलहल्ली” का विमोचन किया गया, जो सहकारी आंदोलन के नेता स्वर्गीय मोलहल्ली शिव राव के जीवन पर आधारित है। बिलिमले ने कहा कि शिव राव ने सहकारी क्षेत्र का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल बनाने के लिए किया। उन्होंने उल्लेख किया कि शिव राव ने महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के मूल्यों से प्रेरित होकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक विरासत को बनाए रखने के लिए स्थानीय नायकों का सम्मान करना आवश्यक है। जब हम अपने इतिहास के संरक्षकों को भूल जाते हैं, तो हम भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत खो देते हैं। तटीय कर्नाटक का आधुनिक बुनियादी ढांचा इन्हीं दूरदर्शी नेताओं की नींव पर खड़ा है।

इन दिग्गजों के योगदान को याद करना केवल इतिहास का सम्मान करना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों को पहचानना है।

बिलिमले ने श्रीनिवास मल्या के योगदान को भी रेखांकित किया, जिन्होंने क्षेत्र में हवाई अड्डे की स्थापना, एनआईटी-के (NIT-K), सुरथकल की स्थापना और शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ये दोनों नेता इस क्षेत्र की 'आंखें' थे, जिनके बिना आज का विकसित तटीय क्षेत्र संभव नहीं होता।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केडीए द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1915 और 2024 के बीच कर्नाटक में 3,200 सरकारी स्कूल बनाए गए थे। शिव राव के समय में सुल्लिया क्षेत्र में स्थापित 16 स्कूलों ने हाल ही में 100 वर्ष पूरे किए हैं। हालांकि, यह विडंबना है कि इनमें से कई स्कूलों के भूमि रिकॉर्ड में इन संस्थापकों के नाम शामिल नहीं हैं, जो उनके योगदान के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

Did You Know?: मोलहल्ली शिव राव ने व्यक्तिगत रूप से पूरे राज्य में यात्रा की ताकि इच्छुक दाताओं से भूमि प्राप्त कर सरकारी स्कूल बनाए जा सकें।

Frequently Asked Questions

1. मोलहल्ली शिव राव का मुख्य योगदान क्या था?
उन्होंने सहकारी क्षेत्र का उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के निर्माण और शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2. केडीए (KDA) ने क्या प्रस्ताव दिया है?
केडीए ने इन नेताओं के सम्मान में स्मारक बनाने या उनके योगदान को दर्शाने वाली किसी भी पहल का समर्थन करने की इच्छा जताई है।