चेन्नई में आयोजित महिला संगोष्ठी 2026 के दौरान प्रसिद्ध अभिनेत्री रेवती ने इस बात पर जोर दिया कि अन्याय पर सवाल उठाना और गरिमा के लिए लड़ना सामाजिक प्रगति के लिए अनिवार्य है।
- अभिनेत्री रेवती ने कहा कि समानता की मांग करना सामाजिक विकास के लिए एक मौलिक आवश्यकता है।
- महिला संगोष्ठी 2026 का विषय 'महिलाओं की सदी की शुरुआत मुझसे होती है: जागरूकता से कार्रवाई तक' था।
- शिक्षा और वित्त क्षेत्र की प्रमुख महिलाओं ने आत्म-संदेह को पीछे छोड़ उद्देश्यपूर्ण कार्य करने पर जोर दिया।
चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में आयोजित महिला संगोष्ठी 2026 में दिग्गज अभिनेत्री रेवती ने उन सामाजिक धारणाओं को चुनौती दी, जो अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं को 'विद्रोही' मानती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि आत्म-सम्मान और समानता की खोज विद्रोह नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है, जो मानव प्रगति का आधार बनती है।
रेवती ने लैंगिक संघर्ष के लंबे इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, मतदान और संपत्ति के जो अधिकार भोग रही हैं, वे उन लोगों के कारण मिले जिन्होंने समाज की नजरों में 'अलग' या 'कठिन' दिखने का साहस किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक विकास हमेशा उन व्यक्तियों पर निर्भर करता है जो कठिन सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि रेवती का यह विमर्श एक व्यापक वैश्विक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ महिलाएँ अब केवल 'जागरूकता' तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 'प्रणालीगत कार्रवाई' की ओर बढ़ रही हैं। समानता को विद्रोह के बजाय आवश्यकता बताकर, वह पारंपरिक सामाजिक ढांचों में महिला मुखरता से जुड़ी ग्लानि को समाप्त कर रही हैं।
वास्तविक सामाजिक प्रगति कभी सीधी रेखा में नहीं होती; यह उस घर्षण से पैदा होती है जब हाशिए पर मौजूद आवाजें यथास्थिति को स्वीकार करने से इनकार कर देती हैं।।
इस कार्यक्रम में येन उड़ान की संस्थापक वेदिका अग्रवाल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बच्चों के विकास और शिक्षा को अपने जीवन का केंद्र बनाकर अपने आत्म-संदेह पर विजय प्राप्त की। उनका सफर व्यक्तिगत संघर्ष से सामूहिक प्रभाव की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कॉर्पोरेट जगत का दृष्टिकोण देते हुए, वरशक्ति हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की एमडी और सीईओ कल्पना शंकर ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा को प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं और दूसरों के परिवर्तन के अवसर के रूप में देखें।
भारत सोका गक्कई द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में निदेशक रशी आहूजा और जया राव ने भी अपने विचार रखे, जिससे लैंगिक स्थिरता और सामाजिक सशक्तिकरण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महिला संगोष्ठी 2026 का विषय क्या था?
इसका विषय 'महिलाओं की सदी की शुरुआत मुझसे होती है: जागरूकता से कार्रवाई तक' था।
चेन्नई में इस कार्यक्रम का आयोजन किसने किया?
इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सोका गक्कई द्वारा किया गया था।