मणिपुर में NRC अपडेट करने की भारी मांग के बाद केंद्र सरकार ने राज्य में जनगणना प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है।
- केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना (Census) को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है।
- मेइती, पांगल्स और नागा समुदायों ने जनगणना से पहले NRC अपडेट करने की मांग की थी।
- मणिपुर उच्च न्यायालय ने भी जनगणना प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
- कुकी-ज़ो काउंसिल ने NRC की मांग का विरोध किया है और वे जनगणना के पक्ष में थे।
केंद्र सरकार ने मणिपुर की संवेदनशील स्थिति और स्थानीय समुदायों की भावनाओं को देखते हुए राज्य में जनगणना (Census) के संचालन को स्थगित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह फैसला नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की, जिसमें मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
बैठक का मुख्य केंद्र मणिपुर के विभिन्न समुदायों, विशेष रूप से मेइती, पांगल्स (मेइती मुस्लिम) और नागाओं द्वारा उठाई गई मांगें थीं। इन समूहों का तर्क है कि जनगणना शुरू करने से पहले राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट किया जाना अनिवार्य है, ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके और वास्तविक नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this deferment is not merely an administrative delay but a strategic political move to prevent further ethnic escalation in an already volatile state. By prioritizing the NRC demand, the Centre is attempting to balance the aspirations of the valley-based communities while navigating the complex demographic tensions between the Meitei and Kuki-Zo populations.
"The intersection of demographic data and citizenship identity in Manipur makes the Census a political tool rather than a simple statistical exercise."
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने 14 नागरिक समाज संगठनों और भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल की सराहना की, जिन्होंने नई दिल्ली में NRC के कार्यान्वयन के लिए प्रभावी पैरवी की थी। साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य के कुछ समूहों से अपील की कि वे हड़ताल और बंद जैसे तरीकों को छोड़कर प्रशासन के साथ संवाद जारी रखें।
कानूनी मोर्चे पर, मणिपुर उच्च न्यायालय ने भी इस दिशा में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और न्यायमूर्ति ए. गुणेश्वर शर्मा की पीठ ने कांगलेइपाक छात्र संघ और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जनगणना प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित रखा जाए। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC अपडेट किया जाए और म्यांमार से होने वाले अवैध प्रवासन को रोका जाए।
हालांकि, इस मुद्दे पर राज्य के भीतर गहरा विभाजन भी दिखाई देता है। प्रभावशाली कुकी-ज़ो काउंसिल ने NRC की मांग को 'समय से पहले और अनुचित' बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका मानना था कि जनगणना प्रक्रिया को बिना किसी देरी के आगे बढ़ना चाहिए था, जो कि मेइती समुदायों की मांगों के बिल्कुल विपरीत है।
| समूह/संस्था | NRC पर रुख | जनगणना पर रुख |
|---|---|---|
| मेइती, नागा, पांगल्स | पहले NRC अपडेट हो (1951 आधार) | NRC के बाद समर्थन |
| कुकी-ज़ो काउंसिल | मांग अनुचित और समय से पहले | पूर्ण समर्थन/स्वागत |
| केंद्र सरकार | संवाद और समीक्षा जारी | फिलहाल स्थगित |
Frequently Asked Questions
1. मणिपुर में जनगणना क्यों स्थगित की गई?
मुख्य रूप से मेइती, नागा और पांगल्स समुदायों की इस मांग के कारण कि जनगणना से पहले NRC को अपडेट किया जाए ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान हो सके।
2. NRC अपडेट के लिए आधार वर्ष क्या मांगा गया है?
नागरिक समाज समूहों और याचिकाओं में 1951 को आधार वर्ष (Base Year) मानने की मांग की गई है।