गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद केंद्र ने मणिपुर में जनगणना के हाउस-लिस्टिंग चरण को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय मेइतेई और नागा समूहों द्वारा पहले NRC लागू करने की जोरदार मांग और राज्य की संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के कारण लिया गया है।
- केंद्र सरकार ने मणिपुर में 1 सितंबर से शुरू होने वाली जनगणना की हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।
- मेइतेई और नागा नागरिक समाज समूहों ने मांग की थी कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) लागू किया जाए।
- मणिपुर उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और 12 अक्टूबर तक प्रक्रिया को रोकने का निर्देश दिया है।
- यह निर्णय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के बाद आया है।
केंद्र सरकार ने मणिपुर के इम्फाल घाटी में मेइतेई बहुल नागरिक समाज समूहों के कड़े विरोध के बाद जनगणना 2027 के हाउस-लिस्टिंग चरण को स्थगित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इन समूहों का तर्क है कि राज्य में जनसंख्या की गणना करने से पहले अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का कार्यान्वयन अनिवार्य है।
यह फैसला उस समय आया जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से एक वचनबद्धता दर्ज की कि 1 सितंबर से शुरू होने वाले हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशंस को स्थगित कर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने भी अदालत को सूचित किया कि वह जनगणना पर अपने पिछले नोटिफिकेशन को तब तक स्थगित रखेगी जब तक केंद्र से औपचारिक निर्देश नहीं मिलते।
क्यों लिया गया यह फैसला?
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय राज्य में मेइतेई और नागा समूहों की भावनाओं, उनकी आकांक्षाओं और मणिपुर की वर्तमान तनावपूर्ण सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री खेमचंद युमनाम और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
"मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जनसांख्यिकीय डेटा का संग्रह केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक चुनौती है, जहाँ पहचान की राजनीति सर्वोपरि है।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि भविष्य के परिसीमन (Delimitation) और संसाधनों के आवंटन से जुड़ा है। घाटी के समूहों को डर है कि यदि NRC के बिना जनगणना होती है, तो अवैध प्रवासियों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों में शामिल हो जाएगी, जिससे स्थानीय समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ऐतिहासिक रूप से, मणिपुर विधानसभा ने अगस्त 2022 और मार्च 2024 में दो अलग-अलग प्रस्ताव पारित कर राज्य में NRC लागू करने की मांग की थी। जनवरी 2023 और जून 2024 में राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर चिंता जताई थी।
| पक्ष | मुख्य मांग/तर्क | चिंता का विषय |
|---|---|---|
| नागरिक समाज समूह | पहले NRC, फिर जनगणना | अवैध प्रवासियों का समावेश |
| केंद्र सरकार | समयबद्ध जनगणना 2027 | प्रशासनिक डेटा और संसाधन योजना |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मणिपुर में जनगणना क्यों स्थगित की गई?
उत्तर: नागरिक समाज समूहों की मांग है कि पहले NRC लागू किया जाए ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान हो सके और वे जनगणना के आंकड़ों में शामिल न हों।
प्रश्न 2: अब अगली सुनवाई कब है?
उत्तर: मणिपुर उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की है।