जल संसाधन मंत्री निम्मला रामा नायडू ने घोषणा की है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की प्रतिबद्धता के कारण दशकों से लंबित वेलीगोंडा परियोजना अब पूरी तरह कार्यात्मक हो गई है। इस परियोजना से कृष्णा नदी का पानी अब नल्लामाला सागर तक पहुँचेगा।
- 30 साल पहले शुरू हुई वेलीगोंडा परियोजना अब पूरी तरह कार्यात्मक।
- मुख्यमंत्री नायडू ने कानूनी बाधाओं को दूर कर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा।
- कृष्णा नदी का पानी अब नल्लामाला सागर तक पहुँचेगा, जिससे सिंचाई में क्रांति आएगी।
आंध्र प्रदेश के जल संसाधन मंत्री निम्मला रामा नायडू ने सोमवार को मार्कपुरम जिले के गंतवनीपल्ली में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू की अटूट प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण पूला सुब्बैया वेलीगोंडा परियोजना अब पूरी तरह से चालू हो गई है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना कई दशकों से चुनौतियों और बाधाओं से जूझ रही थी, लेकिन वर्तमान गठबंधन सरकार ने इसे प्राथमिकता दी।
इस परियोजना की आधारशिला लगभग तीन दशक पहले रखी गई थी। मंत्री निम्मला ने बताया कि 2024 में सत्ता संभालने के बाद, मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से वेलीगोंडा परियोजना पर ध्यान केंद्रित किया और इसे 2026 तक पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हर 15 से 20 दिनों में प्रगति की समीक्षा कर रहे थे और उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वित्त विभाग परियोजना के लिए धन की कोई कमी न होने दे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, वेलीगोंडा परियोजना का पूरा होना केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह आंध्र प्रदेश के सूखे क्षेत्रों के लिए एक जीवनरेखा है। कृष्णा नदी के पानी को नल्लामाला सागर तक पहुँचाकर, सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम उठाया है। यह परियोजना राज्य सरकार की प्रशासनिक दक्षता और बुनियादी ढांचे के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाती है।
"वेलीगोंडा परियोजना का समापन दशकों की प्रशासनिक विफलता को दूर करने और जल प्रबंधन में आधुनिक नेतृत्व की जीत का प्रतीक है।"
तकनीकी विवरणों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने बताया कि कोल्लम वागु में लगभग 1.80 लाख घन मीटर मिट्टी की खुदाई की गई और 3,250 घन मीटर कंक्रीट का काम पूरा किया गया। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 4,924 मीटर लंबी सुरंग और 6,988 मीटर की लाइनिंग का निर्माण था, जिसे निर्धारित लक्ष्य के अनुसार दो वर्षों में पूरा किया गया।
परियोजना की सबसे बड़ी बाधा 1,900 टन वजनी टनल बोरिंग मशीन (TBM) थी, जो पिछले पांच वर्षों से 11.8 किमी के निशान पर फंसी हुई थी। कानूनी मुद्दों को सुलझाने के बाद इसे सफलतापूर्वक सुरंग से बाहर निकाला गया, जिससे काम में तेजी आई। इसके अतिरिक्त, फीडर नहरों के विकास और लाइनिंग के लिए ₹462 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे पानी का परिवहन अधिक कुशल हो गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: वेलीगोंडा परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य कृष्णा नदी के पानी को नल्लामाला सागर तक पहुँचाना है ताकि सूखे प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा मिल सके।
प्रश्न 2: इस परियोजना को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा क्या थी?
उत्तर: कानूनी विवाद और एक विशाल टनल बोरिंग मशीन (TBM) का सुरंग के भीतर फंस जाना सबसे बड़ी बाधाएं थीं।