चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है, जिसमें सत्यापन और डिजिटलीकरण की समस्याओं के कारण लाखों-करोड़ों नाम हटा दिए गए हैं।

  • महाराष्ट्र की ड्राफ्ट लिस्ट से 2.07 करोड़ और दिल्ली से 47.56 लाख मतदाताओं के नाम बाहर।
  • डिजिटलीकरण में कमी, फॉर्म जमा न होने और सत्यापन विफल होने के कारण नाम कटे।
  • दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है।

चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर रोल जारी कर दिया है। इस प्रक्रिया के बाद एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जिसके अनुसार महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ और दिल्ली में 47.56 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं हैं।

आयोग के अनुसार, नाम हटने के मुख्य कारणों में घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में विफलता, डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक फॉर्म का जमा न होना और तकनीकी त्रुटियां शामिल हैं। इसके अलावा, मृत व्यक्तियों, डुप्लिकेट प्रविष्टियों, विदेशियों और उन लोगों के नाम भी हटाए गए हैं जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया है।

दिल्ली की स्थिति पर गौर करें तो कुल 1 करोड़ 45 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 97.53 लाख का रिकॉर्ड ही डिजिटाइज हो पाया है, जिससे लगभग 47.56 लाख लोग इस ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं। महाराष्ट्र में यह संख्या और भी अधिक है, जहाँ 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का डेटा अपडेट नहीं हो पाया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर नामों का कटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक गंभीर चुनौती हो सकता है। हालांकि 'घोस्ट वोटर्स' को हटाना चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी है, लेकिन डिजिटलीकरण की इतनी बड़ी विफलता यह दर्शाती है कि प्रशासनिक स्तर पर अभी बहुत काम बाकी है। यदि नागरिक समय रहते अपने नाम दोबारा नहीं जुड़वाते, तो भविष्य के चुनावों में मतदान प्रतिशत पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

"विशेष गहन पुनरीक्षण एक आवश्यक प्रक्रिया है, लेकिन अब यह नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने मताधिकार को बचाने के लिए सक्रिय हो।"

चुनाव आयोग ने प्रभावित मतदाताओं के लिए एक समय-सीमा तय की है। 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इन दावों का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा, जिसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

नाम सुधारने के लिए आयोग ने तीन मुख्य फॉर्म जारी किए हैं: नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, किसी गलत नाम पर आपत्ति के लिए फॉर्म 7, और पता या स्पेलिंग सुधारने के लिए फॉर्म 8। ये सभी फॉर्म संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

क्षेत्र हटाए गए/गायब नाम डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड
दिल्ली 47.56 लाख 97.53 लाख
महाराष्ट्र 2.07 करोड़ अपूर्ण/प्रक्रियाधीन
क्या आप जानते हैं?: भारत में मतदाता पहचान पत्र (EPIC) की शुरुआत 1993 में की गई थी ताकि चुनाव के दौरान फर्जी मतदान और पहचान की चोरी को रोका जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यदि मेरा नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है तो मुझे क्या करना चाहिए?
आपको 30 सितंबर 2026 से पहले CEO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म 6 भरना चाहिए और जरूरी दस्तावेज जमा करने चाहिए।

प्रश्न 2: अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?
सभी दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।