नासिक ग्रामीण पुलिस ने समृद्धि महामार्ग पर आतंक मचाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सड़क पर कीलें फैलाकर वाहनों को रोकता था और फिर हथियारबंद हमला करता था।
- समृद्धि महामार्ग पर 90 मिनट के भीतर तीन अलग-अलग लूटपाट की घटनाएं दर्ज।
- अपराधी सड़क पर नुकीली कीलें और लोहे की छड़ें फैलाकर टायर पंक्चर करते थे।
- नासिक पुलिस ने 125 CCTV कैमरों की जांच कर उस्मानाबाद से 6 आरोपियों को दबोचा।
महाराष्ट्र के समृद्धि महामार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक सामने आई है, जहां एक संगठित गिरोह ने महज 90 मिनट के भीतर तीन अलग-अलग वाहनों को निशाना बनाया। इन हमलों ने न केवल यात्रियों में डर पैदा कर दिया है, बल्कि राज्य की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नासिक ग्रामीण पुलिस ने एक व्यापक ऑपरेशन चलाकर इस गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि 6 अन्य अभी भी फरार हैं।
घटनाक्रम 27 अगस्त का है, जब वावी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मालधोन और दुशिंगपुर क्षेत्रों में यह वारदातें हुईं। गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद खतरनाक थी; वे सड़क पर नुकीली कीलें और धातु के टुकड़े फैला देते थे। जैसे ही किसी वाहन का टायर पंक्चर होता और चालक रुकता, 11-12 हथियारबंद हमलावर उन्हें घेर लेते थे। एक मामले में, छत्रपति संभाजीनगर से मुंबई जा रहे एक परिवार से सोने के गहने, घड़ियां और नकदी लूट ली गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 18.09 लाख रुपये आंकी गई है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे, जो अपनी गति और दक्षता के लिए जाने जाते हैं, यदि उचित निगरानी और पेट्रोलिंग के बिना छोड़े जाएं, तो वे अपराधियों के लिए 'हंटिंग ग्राउंड' बन सकते हैं। यह केवल लूटपाट नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रोटोकॉल की विफलता है।
लूट के अन्य मामलों में, नांदेड़ के एक व्यवसायी ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से हवा में फायरिंग कर हमलावरों को खदेड़ दिया। वहीं, एक अन्य घटना में मुंबई जा रहे एक गंभीर मरीज के वाहन को रोककर करीब 1 लाख रुपये लूट लिए गए। पुलिस ने बताया कि आरोपी उस्मानाबाद जिले के रहने वाले हैं और इस वारदात को अंजाम देने के लिए 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके आए थे।
हाईवे पर सुरक्षा केवल कैमरों से नहीं, बल्कि त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) की भौतिक उपस्थिति से सुनिश्चित होती है।
नासिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक डी एस स्वामी ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए 50 सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। पुलिस ने 125 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले, जिससे पता चला कि दो संदिग्ध वाहन एक साथ उस्मानाबाद की ओर जा रहे थे। आरोपियों ने अपनी गाड़ियों को घटनास्थल से 5 किमी दूर खड़ा किया था ताकि पुलिस उन्हें ट्रैक न कर सके और वे जंगल के रास्तों से भाग सकें।
अब प्रशासन ने समृद्धि महामार्ग के 100 किमी के संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा बढ़ा दी है। छह से सात स्थानों पर पुलिस की स्थायी तैनाती की गई है और अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने इस मार्ग पर एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) तैनात करने का भी निर्णय लिया है।
प्रश्न 1: गिरोह ने वाहनों को रोकने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
उत्तर: गिरोह ने सड़क पर नुकीली कीलें और लोहे के टुकड़े फैलाए थे ताकि वाहनों के टायर पंक्चर हो जाएं और वे रुकने पर मजबूर हो जाएं।
प्रश्न 2: पुलिस ने आरोपियों को कैसे ट्रैक किया?
उत्तर: पुलिस ने 125 से अधिक CCTV कैमरों के फुटेज और वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड का विश्लेषण कर उन्हें उस्मानाबाद जिले में खोज निकाला।