तिरुचि के शिल्पकार अब विनायक चतुर्थी के लिए टैपिओका आटा और बीज आधारित मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं, जो जल प्रदूषण को रोकने में सहायक हैं। परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा संगम अब लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

  • टैपिओका आटे और प्राकृतिक गोंद से बनी 'बॉम्बे मॉडल' की मूर्तियां लोकप्रिय हो रही हैं।
  • पीपीओ (PoP) और रासायनिक रंगों के बजाय बीज-आधारित 'डू-इट-योरसेल्फ' किट का चलन बढ़ा है।
  • कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण मूर्तियों की लागत में वृद्धि हुई है।

तमिलनाडु के तिरुचि जिले के नंगमंगलम चथिरम गांव में, पांचवीं पीढ़ी के अनुभवी मूर्तिकार एस. पेरियासामी अपनी कार्यशाला में विनायक चतुर्थी की तैयारियों में जुटे हैं। वे दशकों से प्रसिद्ध 'बॉम्बे मॉडल' की विशाल जुलूस मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं, लेकिन इस वर्ष एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के बजाय पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

पेरियासामी ने इस साल 3 फीट से लेकर 10 फीट तक की लगभग 60 विशाल मूर्तियां तैयार की हैं। इन मूर्तियों की खासियत यह है कि इन्हें टैपिओका आटे (Tapioca Flour) को गूंथकर डाई-कास्ट मोल्ड्स में सेट करके बनाया गया है। मूर्तियों के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए लकड़ी की डंडियों और प्राकृतिक चिपकने वाले पेस्ट का उपयोग किया गया है। इन मूर्तियों की कीमत ₹3,000 प्रति फुट से शुरू होकर ₹30,000 तक जाती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पारिस्थितिक है। पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियां परिवहन के दौरान आसानी से टूट जाती थीं और PoP पानी में नहीं घुलता था, जिससे जल निकाय प्रदूषित होते थे। टैपिओका आधारित मूर्तियां हल्की होती हैं और विसर्जन के बाद प्रकृति में आसानी से मिल जाती हैं, जो सतत उत्सव (Sustainable Celebration) की दिशा में एक बड़ा कदम है।

"पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का चयन केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।"

मूर्तिकला की इस परंपरा के साथ-साथ, शहर में 'डू-इट-योरसेल्फ' (DIY) कार्यक्रमों का भी चलन बढ़ा है। अभ्यासम जैसे विरासत शिक्षण केंद्र परिवारों और बच्चों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं। यहाँ लोगों को मिट्टी और बीजों के मिश्रण से अपनी छोटी गणेश प्रतिमा बनाने की शिक्षा दी जाती है।

इन विशेष किटों में ऐसी सब्जियां और पौधों के बीज होते हैं जो तेजी से उगते हैं। जब इन मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है, तो वे मिट्टी में मिल जाती हैं और उनसे पौधे उग आते हैं। यह प्रक्रिया विसर्जन के पारंपरिक विचार को 'प्रदूषण' से बदलकर 'वृक्षारोपण' में बदल देती है।

क्या आप जानते हैं?: टैपिओका आटा वास्तव में कसावा जड़ से निकाला जाता है, जो इसे एक मजबूत लेकिन पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल आधार प्रदान करता है।
सामग्रीपर्यावरण प्रभावस्थायित्व (परिवहन)विसर्जन परिणाम
प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP)अत्यधिक हानिकारकउच्चजल प्रदूषण
पारंपरिक मिट्टीसुरक्षितकम (जल्दी टूटती है)मिट्टी में मिल जाती है
टैपिओका आटा/बीजअत्यधिक सुरक्षितमध्यमपौधे उगते हैं/घुलनशील

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: टैपिओका आटे की मूर्तियों का रखरखाव कैसे करें?
उत्तर: इन मूर्तियों को पूरी तरह से शुष्क परिस्थितियों में रखना चाहिए क्योंकि बारिश या नमी के संपर्क में आने पर आटा जल्दी घुल सकता है।

प्रश्न 2: बीज-आधारित मूर्तियों का लाभ क्या है?
उत्तर: इन मूर्तियों के विसर्जन के बाद, उनमें मौजूद बीज मिट्टी में उगकर पौधे बन जाते हैं, जिससे पर्यावरण समृद्ध होता है।