वकीलों के भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा ईमानदारी पर उठाए गए सवालों के बाद, राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने न्यायिक कार्यों से दूरी बना ली है।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने स्वयं को मामलों की सुनवाई से अलग कर लिया है।
- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को पत्र लिखकर उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाए थे।
- वकीलों के संघ द्वारा किए जा रहे तीव्र विरोध प्रदर्शनों के कारण रोस्टर में बदलाव किया गया।
राजस्थान उच्च न्यायालय में उस समय भारी उथल-पुथल मच गई जब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने अचानक मामलों की सुनवाई से खुद को अलग करने का निर्णय लिया। यह घटनाक्रम उस समय आया जब राज्य के वकील संघों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और न्यायालय परिसर में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए।
प्रारंभिक रोस्टर के अनुसार, 31 अगस्त से जस्टिस शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की एक डिवीजन बेंच को जनहित याचिकाओं (PIL), विशेष अपीलों, आयकर मामलों और अवमानना याचिकाओं जैसी महत्वपूर्ण श्रेणियों की सुनवाई करनी थी। हालांकि, सोमवार को बढ़ते दबाव के बीच कार्यवाहक CJ ने रोस्टर में संशोधन किया और खुद को इन मामलों से बाहर कर लिया। अब इन मामलों की जिम्मेदारी जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की बेंच को सौंपी गई है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि न्यायपालिका के भीतर एक गहरे संकट का संकेत है। जब एक उच्च पदस्थ न्यायाधीश की 'अखंडता' (Integrity) पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरी न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे आंतरिक पत्राचार के सार्वजनिक होने से न्यायिक स्थिरता डगमगा सकती है।
न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच का संतुलन तब टूट जाता है जब वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच मतभेद सार्वजनिक मंच पर आ जाते हैं।
इस विवाद की जड़ें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को लिखे गए पत्रों में छिपी हैं। अगस्त महीने में भेजे गए तीन अलग-अलग पत्रों में जस्टिस मेहता ने जस्टिस शर्मा पर "शक्तियों के दुरुपयोग" का आरोप लगाया था। उन्होंने CJI को सूचित किया कि उन्हें कई ऐसी शिकायतें मिली हैं जो कार्यवाहक CJ की ईमानदारी पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं।
इतना ही नहीं, जस्टिस मेहता ने कॉलेजियम के अन्य सदस्यों को भी इस मामले में शामिल करते हुए मांग की कि जस्टिस शर्मा का स्थानांतरण किसी अन्य उच्च न्यायालय में कर दिया जाए और राजस्थान के लिए एक नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए।
ऐतिहासिक संदर्भ
राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्थानांतरण और आंतरिक विवादों का इतिहास रहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश द्वारा सीधे CJI को पत्र लिखकर किसी हाई कोर्ट के एक्टिंग CJ की ईमानदारी पर सवाल उठाना एक दुर्लभ और गंभीर घटना मानी जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुनवाई क्यों छोड़ी?
उत्तर: वकीलों के विरोध और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उनकी ईमानदारी पर उठाए गए सवालों के कारण उन्होंने खुद को अलग किया।
प्रश्न 2: अब उनके मामलों की सुनवाई कौन करेगा?
उत्तर: जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की डिवीजन बेंच अब इन मामलों की सुनवाई करेगी।