रायगडा में तैनात रेलवे कर्मचारियों के परिवारों ने विशाखापत्तनम लौटने की मांग को लेकर दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाया।
- रायगडा रेलवे डिवीजन में तैनात कर्मचारियों के परिवारों ने विशाखापत्तनम के सिरिपुरम स्थित SCoR मुख्यालय पर प्रदर्शन किया।
- मुख्य मांगों में विशाखापत्तनम डिवीजन में तत्काल वापसी और DPR के पैरा 9.3 का कार्यान्वयन शामिल है।
- प्रदर्शनकारियों ने मानसिक तनाव, बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल में आने वाली समस्याओं को उजागर किया।
प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ एक बड़े जनाक्रोश में, पूर्व वालतईर डिवीजन के उन रेलवे कर्मचारियों के परिवारों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया, जो वर्तमान में रायगडा रेलवे डिवीजन में तैनात हैं। यह विरोध प्रदर्शन विशाखापत्तनम के सिरिपुरम में दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) मुख्यालय के सामने हुआ, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता ने हिस्सा लिया।
इस विवाद की जड़ रेलवे डिवीजनों के विवादास्पद द्विभाजन (bifurcation) में है। प्रदर्शनकारियों ने SCoR और पूर्व तटीय रेलवे (ECoR) प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस प्रशासनिक बदलाव के बाद कई कर्मचारी अपने परिवारों से दूर रहने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें भारी मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। परिवारों ने विशेष रूप से बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों के इलाज में हो रही कठिनाइयों पर चिंता व्यक्त की है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक लॉजिस्टिक समस्या नहीं है, बल्कि डिवीजन पुनर्गठन के दौरान मानवीय दृष्टिकोण की कमी है। जब बड़े पैमाने पर नौकरशाही बदलाव कार्यबल की सामाजिक-भावनात्मक स्थिरता की अनदेखी करते हैं, तो इससे उत्पादकता में कमी आती है और संस्थागत असंतोष बढ़ता है। 'त्रिकोणीय और पंचकोणीय रोटेशन नीति' की मांग यह दर्शाती है कि कर्मचारी एक ऐसी प्रणाली चाहते हैं जो वरिष्ठ कर्मियों को उनके घर वापस लौटने का अवसर दे।
डिवीजन विभाजन के दौरान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के दिशा-निर्देशों को लागू करने में विफलता ने रेलवे कार्यबल के भीतर एक मानवीय संकट पैदा कर दिया है।
रायगडा रेलवे कर्मचारी परिवार संयुक्त कार्य मंच ने छह प्रमुख मांगों वाला एक ज्ञापन सौंपा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के पैरा 9.3 का तत्काल कार्यान्वयन है, जिसके तहत विकल्प आमंत्रित किए जाने और संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार करने की बात कही गई है। इसके अलावा, 24 जुलाई को हुई प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी (PCPO) की बैठक के अनुरूप एक संयुक्त प्रक्रिया आदेश (JPO) जारी करने की मांग की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने विशाखापत्तनम डिवीजन में सेवा लीन (service liens) और पदोन्नति की संभावनाओं की सुरक्षा की भी मांग की। उन्होंने 1 जून, 2026 से जारी उन एकतरफा पोस्टिंग आदेशों को रद्द करने की मांग की है, जिन्होंने संयुक्त वरिष्ठता सूचियों की अनदेखी की है, जिससे कई कर्मचारियों के करियर की प्रगति खतरे में पड़ गई है।
| वर्तमान स्थिति | मांगी गई समाधान |
|---|---|
| जून 2026 से एकतरफा पोस्टिंग आदेश | एकतरफा आदेशों को रद्द करना; संयुक्त वरिष्ठता सूची का उपयोग |
| परिवारों से लंबे समय तक अलगाव | विशाखापत्तनम डिवीजन में तत्काल वापसी (Repatriation) |
| स्थिर रोटेशन नीतियां | नए रिक्रूट्स के लिए त्रिकोणीय और पंचकोणीय रोटेशन की बहाली |
जैसे-जैसे स्थिति तनावपूर्ण हो रही है, प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस प्रशासनिक राहत नहीं मिली, तो विरोध प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने रेलवे बोर्ड से सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि प्रभावित कार्यबल के कल्याण और करियर की प्रगति को सुरक्षित किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्रदर्शनकारी परिवारों की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग यह है कि रायगडा डिवीजन में तैनात रेलवे कर्मचारियों को तत्काल विशाखापत्तनम डिवीजन में वापस भेजा जाए।
प्रश्न 2: DPR का पैरा 9.3 क्या है?
यह विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का एक विशिष्ट नियम है जो डिवीजन विभाजन के दौरान कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए विकल्प आमंत्रित करने और संयुक्त वरिष्ठता सूची बनाने की प्रक्रिया निर्धारित करता है।