हरियाणा के निजी अस्पतालों ने लगभग ₹1,200 करोड़ के बकाया दावों के कारण 1 सितंबर को आयुष्मान भारत सेवाओं को 24 घंटे के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया है। IMA ने चेतावनी दी है कि भुगतान में देरी से छोटे अस्पताल बंद हो सकते हैं।
- हरियाणा के निजी अस्पताल 1 सितंबर को 24 घंटे के लिए आयुष्मान भारत सेवाएं बंद रखेंगे।
- IMA के अनुसार राज्य सरकार पर लगभग ₹1,200 करोड़ का बकाया है।
- आपातकालीन सेवाओं को जारी रखा जाएगा, लेकिन नए नियमित मरीजों को भर्ती नहीं किया जाएगा।
- 16 सितंबर से लंबी अवधि के लिए सेवाओं को रोकने की चेतावनी।
हरियाणा के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने घोषणा की है कि राज्य सरकार द्वारा बकाया भुगतान न किए जाने के कारण 1 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना के तहत सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित रहेंगी। IMA ने लगभग ₹1,200 करोड़ के लंबित दावों का मुद्दा उठाया है और एक पारदर्शी प्रतिपूर्ति प्रणाली की मांग की है।
करनाल में IMA प्रवक्ता डॉ. कमल चरया ने स्पष्ट किया कि सरकार को बकाया राशि चुकाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान नहीं किया गया, तो 15 सितंबर को अगली रणनीति तय की जाएगी। विशेष रूप से पानीपत में स्थिति गंभीर है, जहां लगभग ₹80 करोड़ के दावे लंबित हैं, जिससे कई छोटे अस्पताल वित्तीय दबाव के कारण बंद होने की कगार पर हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल की विफलता को दर्शाता है। जब राज्य निजी भागीदारों को समय पर भुगतान नहीं करता है, तो इसका सीधा असर उन गरीब मरीजों पर पड़ता है जो जीवन रक्षक सर्जरी के लिए आयुष्मान भारत योजना पर निर्भर हैं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तुलना में, जहां भुगतान समय पर होता है, हरियाणा की प्रशासनिक विफलता स्पष्ट नजर आती है।
"द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा की वित्तीय व्यवहार्यता समय पर प्रतिपूर्ति पर निर्भर करती है; इसके बिना, गरीबों के लिए देखभाल की गुणवत्ता अनिवार्य रूप से गिर जाती है।"
यह टकराव पहली बार नहीं हुआ है। जनवरी से अप्रैल के बीच IMA ने कई बार सेवाओं को वापस लेने की धमकी दी थी। जून में, ₹400 करोड़ के बकाया और कम पैकेज दरों को लेकर लगभग 600 निजी अस्पतालों ने हड़ताल की थी। हाल ही में 7 से 26 अगस्त तक 19 दिनों का निलन भी हुआ था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला।
इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और विनेश फोगाट ने सैनी सरकार पर मरीजों की अनदेखी का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली ने तर्क दिया कि कुछ बिलों में विसंगतियां पाई गई हैं और सरकार केंद्र के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन कर रही है।
| विशेषता | हरियाणा की स्थिति | यूपी की स्थिति (IMA के अनुसार) |
|---|---|---|
| भुगतान समय सीमा | बार-बार देरी | समय पर भुगतान |
| लंबित राशि | ~₹1,200 करोड़ | काफी कम |
| अस्पताल स्थिरता | बंद होने का उच्च जोखिम | स्थिर संचालन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हड़ताल के दौरान आपातकालीन मरीजों का इलाज होगा?
हाँ, IMA ने स्पष्ट किया है कि किसी की जान जोखिम में न पड़े, इसलिए आपातकालीन मामलों को भर्ती और उपचार दिया जाएगा।
यदि 15 सितंबर तक भुगतान नहीं हुआ तो क्या होगा?
IMA ने चेतावनी दी है कि 16 सितंबर से सेवाओं का लंबा और अनिश्चितकालीन निलन किया जा सकता है।