मणिपुर के आठ नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कुकी-ज़ो नेताओं और उग्रवादी समूहों द्वारा नागा नागरिकों पर किए जा रहे हमलों को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
- नौ में से आठ नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक पत्र भेजा है।
- विधायकों ने आरोप लगाया है कि कुकी-ज़ो नेता और उग्रवादी समूह नागा नागरिकों की हत्याओं में शामिल हैं।
- प्रमुख मांगों में विशिष्ट उग्रवादी नेताओं की गिरफ्तारी और 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समझौते को रद्द करना शामिल है।
- सरकारी कार्यालयों और उग्रवादी समूहों के बीच मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक तनाव के बीच, मणिपुर के नागा विधायकों के एक समूह ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। राज्य की वर्तमान सुरक्षा स्थिति को "गंभीर और अस्थिर" बताते हुए, इन विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस हिंसा को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोशी डिको ने पुष्टि की है कि आठ विधायकों के हस्ताक्षर वाला यह पत्र अमित शाह को भेज दिया गया है।
इस पत्र में विशेष रूप से कुकी-ज़ो नेताओं और उनसे जुड़े उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। विधायकों का आरोप है कि नागा नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसमें हत्या और शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत करने जैसी भयानक घटनाएं शामिल हैं। जनप्रतिनिधियों ने केवल शांति वार्ता नहीं, बल्कि उग्रवाद के ढांचे को ध्वस्त करने के लिए "निर्णायक और साहसिक कार्रवाई" की मांग की है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना राज्य के प्रशासनिक ढांचे के भीतर गहरे मतभेदों को दर्शाती है। जब निर्वाचित प्रतिनिधि अपने ही सहयोगियों—जैसे कि उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के खिलाफ मिलीभगत के आरोप लगाते हैं—तो यह सत्ताधारी गठबंधन के भीतर विश्वास की कमी को उजागर करता है। सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग विशेष रूप से विस्फोटक है, क्योंकि यदि इसे सावधानी से नहीं संभाला गया, तो यह क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष को फिर से जन्म दे सकता है।
मध्यस्थता से हटकर युद्धविराम समझौतों को रद्द करने की मांग करना मणिपुर में सुरक्षा टकराव की ओर एक खतरनाक मोड़ है।
विधायकों ने पांच मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख कुकी नेशनल फ्रंट-पी (KNF-P) के थांगबोई किपगेन की तत्काल गिरफ्तारी है, जिन्हें हिंसा का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। इसके अलावा, उन्होंने नेमचा किपगेन के कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि उनके कार्यालय की मिलीभगत उनके पति द्वारा संचालित उग्रवादी समूहों के साथ रही है।
ऐतिहासिक रूप से, मणिपुर मैतेई, कुकी और नागा समुदायों के बीच जातीय पहचान की राजनीति का केंद्र रहा है। सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौता शांति वार्ता के लिए एक अवसर प्रदान करने के लिए बनाया गया था, लेकिन नागा विधायकों का तर्क है कि इन समझौतों का उपयोग उग्रवादी समूहों द्वारा नागरिकों पर हमलों को जारी रखने के लिए एक ढाल के रूप में किया जा रहा है।
| मांग | लक्षित व्यक्ति/कार्रवाई | कारण |
|---|---|---|
| गिरफ्तारी | थांगबोई किपगेन और अन्य | नागरिकों की हत्याओं की जिम्मेदारी |
| नीति परिवर्तन | SoO समझौते को रद्द करना | युद्धविराम शर्तों का बार-बार उल्लंघन |
| जांच | नेमचा किपगेन का कार्यालय | उग्रवादी समूहों के साथ कथित मिलीभगत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 9 में से केवल 8 नागा विधायकों ने ही पत्र पर हस्ताक्षर क्यों किए?
नुंगबा विधायक दिगांगलुंग गांगमे ने अभी तक इस पत्र पर हस्ताक्षर करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।
सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) भारत सरकार और विभिन्न उग्रवादी समूहों के बीच एक युद्धविराम समझौता है ताकि हिंसा रोककर शांति वार्ता शुरू की जा सके।