भारत सरकार ने सिंधु जल संधि पर स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस 'अवैध' न्यायालय का भारत के संप्रभु निर्णयों पर कोई अधिकार नहीं है।

  • भारत ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के फैसले को मानने से इनकार किया।
  • MEA ने कोर्ट के गठन को ही सिंधु जल संधि का 'गंभीर उल्लंघन' बताया।
  • भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद रुकने तक संधि 'निलंबन' (Abeyance) में रहेगी।
  • रैटले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट (RHEP) पर कोर्ट के प्रतिबंधों को भारत ने खारिज किया।

नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) के उस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सिंधु जल संधि (IWT) अभी भी पूरी तरह प्रभावी है। भारत ने इस न्यायालय के अस्तित्व को ही कानूनन अवैध करार दिया है और कहा है कि इसे विश्व बैंक द्वारा संधि की शर्तों का उल्लंघन करके गठित किया गया था।

भारत का तर्क है कि इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय के पास भारत के संप्रभु निर्णयों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) नहीं है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत ने इस निकाय के सामने कभी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई और न ही इसके पिछले किसी भी निर्णय को मान्यता दी है। भारत के अनुसार, यह निकाय संधि के प्रावधानों के विरुद्ध बनाया गया है, इसलिए इसके किसी भी आदेश का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि भारत अब 'पानी' को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहा है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को 'निलंबन' (abeyance) में डालने का जो फैसला किया था, वह यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अब आतंकवाद और कूटनीतिक समझौतों को अलग-अलग नहीं देखती। भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देता है कि संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी जल-समझौते से ऊपर हैं।

"भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून की तुलना में राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को प्राथमिकता देने की एक सोची-समझी रणनीति है।"

इस विवाद का मुख्य केंद्र रैटले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट (RHEP) है। पाकिस्तान की याचिका पर विचार करते हुए, हेग कोर्ट ने भारत को RHEP बांध की दीवार और बिजली सेवन संरचना के निर्माण पर कुछ स्तरों से ऊपर रोक लगाने का आदेश दिया था। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस आदेश का पालन नहीं करेगा और उसके प्रोजेक्ट्स बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे।

ऐतिहासिक रूप से, सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी। यह दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक मानी जाती रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के साथ-साथ इसके कार्यान्वयन पर गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं।

पक्ष मुख्य तर्क/दावा रुख
भारत आतंकवाद के कारण संधि निलंबित; कोर्ट अवैध है। निर्णय को खारिज किया
पाकिस्तान संधि प्रभावी है; भारत पानी का 'हथियार' बना रहा है। कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
PCA (हेग) संधि लागू है; भारत को दायित्व निभाने चाहिए। निर्माण पर रोक लगाई
क्या आप जानते हैं?: सिंधु जल संधि के तहत छह पश्चिमी नदियों का नियंत्रण मुख्य रूप से पाकिस्तान को और तीन पूर्वी नदियों का भारत को दिया गया था।

Frequently Asked Questions

1. भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित क्यों किया?
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह निर्णय लिया, यह कहते हुए कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद जारी रहने तक संधि स्थगित रहेगी।

2. रैटले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट (RHEP) क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर में भारत द्वारा विकसित एक जलविद्युत परियोजना है, जिस पर पाकिस्तान ने तकनीकी आपत्तियां जताई हैं और हेग कोर्ट से रोक लगाने की मांग की थी।