पोलवरम जिले के कोथुलगुट्टा स्थित आदिवासी कल्याण आवासीय विद्यालय की कक्षा 7 की छात्रा तेलम जाह्नवी की मौत के बाद प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

  • 13 वर्षीय तेलम जाह्नवी की मौत की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित।
  • परिजनों ने शिक्षकों पर समय पर इलाज न दिलाने और लापरवाही का आरोप लगाया है।
  • जांच समिति को 7 सितंबर, 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।

पोलवरम जिले के प्रशासन ने कोथुलगुट्टा स्थित ए.पी. ट्राइबल वेलफेयर रेजिडेंशियल स्कूल की 13 वर्षीय छात्रा तेलम जाह्नवी की दुखद मृत्यु की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। कुनवरम मंडल के पल्लुरु गांव की निवासी जाह्नवी कक्षा 7 की छात्रा थी, जिसकी मृत्यु ने स्थानीय आदिवासी समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है।

इस मामले की जांच के लिए एक विशेष चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस पैनल में चिंतूर ITDA सहायक परियोजना अधिकारी (जनजातीय कल्याण), जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला अस्पताल सेवा समन्वयक और पोलवरम जिले के जनजातीय कल्याण उप निदेशक शामिल हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य छात्रा को दिए गए चिकित्सा उपचार के समय और गुणवत्ता की बारीकी से जांच करना है।

घटनाक्रम का विवरण

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य संकट 29 अगस्त को शुरू हुआ जब जाह्नवी ने उल्टी की शिकायत की। स्कूल के शिक्षकों ने उसे कोथुलगुट्टा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, लेकिन उसी दिन उसे छुट्टी देकर हॉस्टल वापस भेज दिया गया। चिंताजनक बात यह है कि 30 अगस्त को उसे फिर से वही समस्या हुई, जिसके बाद उसे कुनवरम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे भद्राचलम और फिर खम्मम रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना हाशिए पर रहने वाली आदिवासी आबादी के लिए बनाए गए आवासीय स्कूलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल की प्रणालीगत विफलता को उजागर करती है। लक्षणों की पहली शुरुआत और अंतिम रेफरल के बीच का अंतराल प्रारंभिक निदान और निगरानी प्रक्रिया में गंभीर चूक का संकेत देता है।

आवासीय सेटिंग में तीव्र लक्षणों के बाद रोगी की निगरानी करने में विफलता अक्सर प्रशिक्षित चिकित्सा निरीक्षण की कमी को दर्शाती है।

इस त्रासदी के बाद, मृतका के माता-पिता ने विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सहायता प्रदान करने में विफलता बरती। ITDA परियोजना अधिकारी शुभम नोकवल ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में पुष्टि की कि जांच में शिक्षकों की भूमिका और अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया की गहन जांच की जाएगी।

क्या आप जानते हैं?: एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA) भारत में एक विशेष निकाय है जिसे लक्षित शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से दूरदराज के आदिवासी गांवों तक विकास पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जांच का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जांच का नेतृत्व चिंतूर ITDA सहायक परियोजना अधिकारी और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित चार सदस्यीय समिति कर रही है।

जांच रिपोर्ट कब तक सौंपी जाएगी?
समिति को 7 सितंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।