कर्नाटक सरकार ने गृह लक्ष्मी योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों को हटाने के लिए बायोमेट्रिक और फेशियल ऑथेंटिकेशन अभियान शुरू किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक पात्र लाभार्थियों के भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- गृह लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों का बायोमेट्रिक और फेशियल ऑथेंटिकेशन अनिवार्य।
- मृतकों, प्रवासियों और आयकरदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।
- सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक महीने की समय सीमा तय की गई है।
- शिमोगा जिले में अब तक 3.78 लाख लाभार्थियों को ₹2,391 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी गृह लक्ष्मी योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक पुन: सत्यापन अभियान शुरू किया है। शिमोगा जिले के गारंटी योजना कार्यान्वयन प्राधिकरण के अध्यक्ष सी.एस. चंद्रभूपाल ने पुष्टि की है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल उन लोगों को बाहर करना है जो योजना के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो महिलाएं वास्तव में पात्र हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और उनके लाभ बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे।
इस अभियान की आवश्यकता तब पड़ी जब यह पाया गया कि कई ऐसे लोगों के नाम सूची में थे जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, या राज्य से पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा, ऐसे लोग भी पाए गए जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में आयकर (Income Tax) और जीएसटी (GST) का भुगतान किया है, जो योजना की पात्रता शर्तों के विरुद्ध है। सरकार अब इन अपात्र नामों को हटाकर सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकना चाहती है।
सत्यापन की डिजिटल प्रक्रिया
सत्यापन कार्य को आधुनिक बनाने के लिए नागरिक सेवा इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी निदेशालय द्वारा एक विशेष वेब और मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है। सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित करेंगे और मौके पर ही लाभार्थी की फोटो, GPS कोऑर्डिनेट्स, फेशियल ऑथेंटिकेशन और वोटर आईडी (EPIC) विवरण डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करेंगे।
"डिजिटल सत्यापन का यह कदम न केवल भ्रष्टाचार को कम करेगा बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि अंतिम छोर पर खड़ी पात्र महिला को उसका हक मिले।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह कदम राज्य सरकार द्वारा वित्तीय अनुशासन लागू करने की एक कोशिश है। जब किसी योजना का बजट हजारों करोड़ में होता है, तो 'लीकेज' (leakage) होना स्वाभाविक है। बायोमेट्रिक डेटा को खाद्य विभाग के राशन डेटा के साथ क्रॉस-वेरिफाई करना यह दर्शाता है कि सरकार अब 'सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ' (Single Source of Truth) मॉडल की ओर बढ़ रही है ताकि डुप्लीकेशन को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
यदि घर पर फेशियल ऑथेंटिकेशन विफल रहता है, तो लाभार्थियों को नजदीकी उचित मूल्य की दुकान (Fair Price Shop), ग्राम वन, कर्नाटक वन या बापूजी सेवा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराने की सुविधा दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को इस पूरी प्रक्रिया को एक महीने के भीतर पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
| सत्यापन का तरीका | कहाँ उपलब्ध | आवश्यक दस्तावेज |
|---|---|---|
| फेशियल ऑथेंटिकेशन | घर पर (डोर-टू-डोर) | EPIC (वोटर आईडी) |
| बायोमेट्रिक सत्यापन | राशन दुकान/CSC केंद्र | आधार/बायोमेट्रिक डेटा |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मेरा नाम सूची से कट सकता है?
उत्तर: केवल तभी, यदि आप आयकरदाता हैं, प्रवासी हैं, या पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। पात्र लाभार्थियों को डरने की जरूरत नहीं है।
प्रश्न 2: यदि मैं घर पर सत्यापन नहीं करा पाती हूँ तो क्या करें?
उत्तर: आप अपने नजदीकी ग्राम वन, कर्नाटक वन या उचित मूल्य की दुकान (राशन दुकान) पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन करा सकती हैं।