उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने केरल में भूमि की कमी को देखते हुए पारंपरिक उद्योगों के बजाय हाई-टेक उद्योगों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है ताकि युवाओं का पलायन रोका जा सके।
- केरल को रिवर्स माइग्रेशन (वापसी पलायन) के लिए हाई-टेक उद्योगों की आवश्यकता है।
- भूमि की उच्च लागत पारंपरिक उद्योगों के विकास में बड़ी बाधा है।
- शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर।
- केरल में जल्द ही एक AIIMS संस्थान खुलने की संभावना।
कोच्चि के कक्कनाड स्थित राजीगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह में बोलते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्य की आर्थिक दिशा बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण रोडमैप पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केरल की भौगोलिक स्थिति और भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए, राज्य को अब पुराने औद्योगिक मॉडलों को छोड़कर आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों की ओर बढ़ना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि केरल के पास प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन भूमि एक दुर्लभ वस्तु (scarce commodity) बन चुकी है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह से जमीन की कीमतें बढ़ी हैं, उस स्थिति में बड़े पैमाने पर पारंपरिक कारखाने लगाना संभव नहीं है। इसलिए, राज्य को ऐसे उद्योगों को आकर्षित करना चाहिए जो कम जगह में अधिक मूल्यवर्धन (value addition) और उच्च रोजगार सृजन कर सकें, जैसे कि आईटी, बायोटेक और एआई-आधारित स्टार्टअप्स।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि केरल लंबे समय से 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की समस्या से जूझ रहा है, जहाँ शिक्षित युवा बेहतर अवसरों के लिए विदेशों या अन्य भारतीय राज्यों का रुख करते हैं। यदि केरल हाई-टेक हब बनने में सफल रहता है, तो यह न केवल पलायन को रोकेगा बल्कि वैश्विक स्तर की प्रतिभाओं को वापस आकर्षित करेगा, जिससे राज्य की जीडीपी में भारी उछाल आएगा।
शिक्षा केवल जानकारी रटने या पेशेवर प्रमाणपत्र अर्जित करने के बारे में नहीं होनी चाहिए; हमें यह समझना होगा कि समाज और बाजार की वास्तविक आवश्यकताएं क्या हैं।
उच्च शिक्षा के विस्तार पर चर्चा करते हुए श्री राधाकृष्णन ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने 16 IIITs, 8 IIMs और 12 AIIMS जैसे संस्थानों की स्थापना का उदाहरण देते हुए संकेत दिया कि केरल को भी निकट भविष्य में एक AIIMS संस्थान मिलने वाला है, जो स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
इस अवसर पर उन्होंने 'कॉन्फ्लुएंस 3.0' का भी उद्घाटन किया, जो 'भारत और एआई (AI) के प्रभाव' पर आधारित एक उद्योग-अकादमिक शिखर सम्मेलन था। कार्यक्रम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, मुख्यमंत्री वी.डी. सतिसन और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: उपराष्ट्रपति ने पारंपरिक उद्योगों के बजाय हाई-टेक उद्योगों पर जोर क्यों दिया?
उत्तर: क्योंकि केरल में भूमि की उपलब्धता बहुत कम है और जमीन की कीमतें बहुत अधिक हैं, जिससे बड़े पारंपरिक कारखाने लगाना अव्यवहारिक है।
प्रश्न 2: केरल के युवाओं के लिए उपराष्ट्रपति का क्या संदेश था?
उत्तर: उन्होंने युवाओं से नशीली दवाओं (drugs) को 'ना' कहने और अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज और मानवता की भलाई के लिए करने का आग्रह किया।