मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व सरकार द्वारा थूथुकुडी पुलिस फायरिंग मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई रोकने के फैसले की समीक्षा करने के लिए राज्य सरकार से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व सरकार द्वारा अधिकारियों को दी गई राहत की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
- मामला 2018 के थूथुकुडी स्टरलाइट विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस फायरिंग से जुड़ा है।
- कोर्ट ने तत्कालीन कलेक्टर एन. वेंकटेश और दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के सरकारी आदेश (GO) पर सवाल उठाए हैं।
मदुरै स्थित मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सोमवार को 2018 में दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मांगा। न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. सख्तिवेल की पीठ ने उन सरकारी आदेशों (G.O.s) की जांच करने के लिए वर्तमान सरकार के रुख को जानने की इच्छा व्यक्त की, जिनके माध्यम से पिछली सरकार ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि पिछली DMK सरकार के कार्यकाल के दौरान, तत्कालीन थूथुकुडी कलेक्टर एन. वेंकटेश, तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IG) शैलेश कुमार यादव और तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) कपिल कुमार सी. सरतकर के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को रोक दिया गया था। कोर्ट अब यह जानना चाहता है कि वर्तमान TVK के नेतृत्व वाली सरकार इन आदेशों की समीक्षा करने पर क्या विचार रखती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this judicial intervention signals a refusal to let administrative impunity prevail in cases of custodial or state-led violence. By questioning the 'dropping' of charges, the High Court is ensuring that political transitions do not lead to the erasure of accountability for human rights violations. This move puts pressure on the current administration to maintain a transparent legal standard regarding the Sterlite tragedy.
न्यायपालिका का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति तक सीमित न रहे, बल्कि कानून के शासन के अधीन हो।
ऐतिहासिक रूप से, यह मामला 22 और 23 मई 2018 को वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें 13 लोगों की जान गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। अगस्त 2018 में, उच्च न्यायालय ने इस पूरी घटना की सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए थे।
अदालत ने पूर्व में न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन जांच आयोग की रिपोर्ट, उस रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई और पीड़ितों के परिवारों को दी गई राहत के विवरण भी मांगे थे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: थूथुकुडी पुलिस फायरिंग मामला क्या है?
यह 2018 में वेदांता स्टरलाइट प्लांट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग का मामला है, जिसमें 13 प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हुई थी।
प्रश्न 2: उच्च न्यायालय ने किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की है?
कोर्ट ने तत्कालीन कलेक्टर एन. वेंकटेश, आईजी शैलेश कुमार यादव और डीआईजी कपिल कुमार सी. सरतकर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।