मणिपुर के कांगपोकपी जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने तीन कुकी ग्रामीणों, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं, की हत्या कर दी। यह हमला उसी सड़क पर हुआ जहां कुछ दिन पहले नागा नागरिकों की हत्या की गई थी।

  • कांगपोकपी जिले में दो महिलाओं सहित तीन कुकी ग्रामीणों की मौत और चार अन्य घायल।
  • हमला एन. तेखंग कुकी गांव में हुआ, जहां गोलीबारी के साथ कई घरों को आग लगा दी गई।
  • स्थानीय संगठनों ने NSCN (I-M) और ZUF (K) जैसे नागा चरमपंथी समूहों पर आरोप लगाया है।
  • यह घटना 27 अगस्त को उसी क्षेत्र में चार लियांगमाई नागा नागरिकों की हत्या के ठीक चार दिन बाद हुई।

जातीय हिंसा के एक भयानक मोड़ में, सोमवार 31 अगस्त 2026 को मणिपुर के कांगपोकपी जिले के एन. तेखंग कुकी गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक क्रूर हमला किया। सुबह करीब 9:30 बजे हुए इस हमले में तीन ग्रामीणों—टिंगनेइचिन ल्होवुम (40), होइनेनेंग ल्होउजेम (21), और लामतिनथांग ल्होउजेम (36)—की मौत हो गई, जिनमें से दो महिलाएं थीं। इस हमले में चार अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

कुकी-ज़ो संगठनों के अनुसार, हमलावरों ने न केवल ग्रामीणों पर अंधाधुंध फायरिंग की, बल्कि कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरा गांव दहशत में है। इस हमले का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसी सड़क पर हुआ जहां 27 अगस्त को चार लियांगमाई नागा नागरिकों की हत्या की गई थी, जो स्पष्ट रूप से प्रतिशोधात्मक हिंसा की ओर इशारा करता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मणिपुर में संघर्ष अब केवल मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें नागा गुट भी शामिल हो गए हैं। यह संघर्ष के दायरे के खतरनाक विस्तार को दर्शाता है, जहां क्षेत्रीय विवादों और जातीय पहचान का उपयोग चरमपंथी तत्वों द्वारा पहाड़ी जिलों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।

कुकी-नागा तनाव की ओर हिंसा का यह झुकाव पारंपरिक जनजातीय गठबंधनों के टूटने और प्रतिशोधात्मक हमलों को रोकने में राज्य की खुफिया विफलता को दर्शाता है।

ट्विलंग एरिया CSO वर्किंग कमेटी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए निहत्थी महिलाओं की हत्या को "अत्यधिक कायरता और नैतिक दिवालियापन" करार दिया है। कमेटी ने सीधे तौर पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) [NSCN (I-M)] और ज़ेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (कमसन) [ZUF (K)] पर आरोप लगाया है, हालांकि इन समूहों ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

वहीं, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन सादर हिल्स ने राज्य सरकार और सुरक्षा बलों की आलोचना करते हुए इसे "प्रणालीगत विफलता" बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्यों राष्ट्रविरोधी तत्वों को इस क्षेत्र में पूरी छूट के साथ काम करने दिया जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मणिपुर 3 मई, 2023 से गंभीर जातीय अशांति की चपेट में है, जिसकी शुरुआत मुख्य रूप से इंफाल घाटी के गैर-जनजातीय मैतेई लोगों और पहाड़ियों के जनजातीय कुकी-ज़ो लोगों के बीच तनाव से हुई थी। हालांकि शुरुआती संघर्ष भूमि अधिकारों और अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे को लेकर था, लेकिन धीरे-धीरे इसका रूप बदल गया। फरवरी 2026 तक, यह तनाव नागा समुदायों तक फैल गया, जिससे पहाड़ी जिलों में जातीय तनाव का एक अस्थिर त्रिकोण बन गया।

तारीखपीड़ितस्थानकथित हमलावर
27 अगस्त, 20264 लियांगमाई नागाकांगपोकपी जिलासंदिग्ध कुकी चरमपंथी
31 अगस्त, 20263 कुकी ग्रामीणएन. तेखंग गांवसंदिग्ध नागा चरमपंथी
क्या आप जानते हैं?: मणिपुर का जटिल जातीय परिदृश्य 30 से अधिक विभिन्न जनजातियों से बना है, जो इसे उत्तर-पूर्व भारत के सबसे विविध लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: हालिया हमले के लिए किन समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया है?
ट्विलंग एरिया CSO वर्किंग कमेटी ने हत्याओं के लिए NSCN (I-M) और ZUF (K) को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रश्न 2: मणिपुर संघर्ष की प्रकृति हाल ही में कैसे बदली है?
मूल रूप से मैतेई-कुकी संघर्ष होने के बाद, अब हिंसा का विस्तार पहाड़ी जिलों में कुकी-ज़ो और नागा समुदायों के बीच तनाव तक हो गया है।