पूसंपट्टी, कचाइकट्टी और वडीपट्टी के निवासियों ने अधिकारियों को याचिका सौंपकर अवैध पत्थर खदानों को बंद करने की मांग की है। इन खदानों के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और भूजल स्तर में गिरावट आ रही है।

  • पूसंपट्टी, कचाइकट्टी और वडीपट्टी के निवासियों ने अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई है।
  • प्रतिदिन 200 से अधिक भारी वाहनों के संचालन से धूल प्रदूषण और सांस की बीमारियां बढ़ी हैं।
  • कानून से अधिक गहराई तक की खुदाई से भूजल और कृषि पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

एक महत्वपूर्ण जन-आंदोलन के तहत, पूसंपट्टी, कचाइकट्टी और वडीपट्टी के निवासियों ने सोमवार को जिला अधिकारियों को एक औपचारिक याचिका सौंपी। ग्रामीणों ने सरकारी नियमों और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली कई पत्थर खदानों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।

याचिका के अनुसार, खनन का पैमाना बेहद चिंताजनक है। प्रतिदिन लगभग 40 से 50 लॉरी और 150 से अधिक भारी वाहन इन स्थलों से पत्थर ले जाते हैं। चूंकि ये वाहन दिन-रात चलते हैं, इसलिए स्थानीय जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और रिहायशी इलाके औद्योगिक ट्रांजिट जोन में बदल गए हैं।

पर्यावरण पर इसका प्रभाव अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। भारी ट्रैफिक के कारण सड़कों पर धूल के विशाल बादल छाए रहते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि बच्चे, बुजुर्ग और मरीज इस प्रदूषित हवा से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि नियामक निगरानी की एक प्रणालीगत विफलता है। जब खनन कानूनी गहराई की सीमा को पार कर जाता है, तो यह भूमिगत जलभृतों (aquifers) को बाधित करता है। इससे जल स्तर में स्थायी गिरावट आती है, जो कृषि पर निर्भर क्षेत्र में दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।

"अनियंत्रित गहरी खुदाई केवल पत्थरों को नहीं हटाती, बल्कि यह जमीन की भूगर्भीय अखंडता को नष्ट करती है और स्थानीय खेती के भविष्य को खतरे में डालती है।"

सामाजिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ताओं में से एक ज्ञानसेकरण ने जोर देकर कहा कि खुदाई कानूनी रूप से अनुमत गहराई से कहीं अधिक नीचे की गई है। यह अवैध खुदाई प्राकृतिक जल चैनलों को नष्ट कर रही है, जिससे क्षेत्र की भूजल आपूर्ति और क्षेत्रीय कृषि गंभीर जोखिम में है।

ग्रामीणों ने एक समन्वित, बहु-विभागीय प्रयास की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन, भूविज्ञान और खनन विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संयुक्त ऑन-साइट निरीक्षण करने का आग्रह किया है। वे चाहते हैं कि खदान लाइसेंस, खुदाई की गहराई और परिवहन किए जा रहे खनिजों की मात्रा की गहन जांच की जाए।

क्या आप जानते हैं?: पत्थर खदानों में अत्यधिक खुदाई से जमीन धंस सकती है और आसपास के सामुदायिक कुएं स्थायी रूप से सूख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ग्रामीण किन विभागों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं?
वे जिला प्रशासन, भूविज्ञान और खनन विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संयुक्त निरीक्षण की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: मुख्य स्वास्थ्य चिंताएं क्या हैं?
मुख्य चिंता भारी वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल के कारण होने वाली सांस और श्वसन संबंधी समस्याएं हैं।