भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने पुदुचेरी में मनरेगा और जल जीवन मिशन जैसी प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन में गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में करोड़ों रुपये की अनुपयोगी संपत्तियों और अधूरे निर्माण कार्यों का विवरण दिया गया है।
- मनरेगा और जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में गंभीर खामियां पाई गईं।
- ₹13.46 करोड़ की जमीन 15 वर्षों से अनुपयोगी पड़ी है।
- आदि द्रविड़ और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के कार्यों में भारी लापरवाही।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी के प्रशासनिक ढांचे और योजना कार्यान्वयन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च 2024 को समाप्त वर्ष के लिए जारी इस रिपोर्ट को बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में पेश किया गया। तमिलनाडु और पुदुचेरी के प्रधान महालेखा परीक्षक (ऑडिट-II), तिरुप्पति वेंकटसामी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन विसंगतियों का विवरण साझा किया।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पुदुचेरी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी कमियां रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार करना था, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि प्रशासनिक शिथिलता के कारण इनके लाभ जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक का नहीं, बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन का है। जब सार्वजनिक धन का उपयोग ऐसी संपत्तियों के लिए किया जाता है जो उपयोग में नहीं आ पातीं, तो यह सीधे तौर पर विकास दर को प्रभावित करता है और करदाताओं के पैसे की बर्बादी है। यह रिपोर्ट शासन में जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य इंदिरा गांधी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस के लिए अधिग्रहित जमीन का है। ₹13.46 करोड़ की लागत से खरीदी गई यह जमीन पिछले 15 वर्षों से केवल इसलिए अनुपयोगी पड़ी है क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए कोई सड़क (approach road) नहीं बनाई गई। यह योजना स्तर पर नियोजन की पूर्ण विफलता को दर्शाता है।
"सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का नियोजन केवल बजट आवंटित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके कार्यान्वयन और उपयोगिता सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।"
इसके अलावा, आदि द्रविड़ और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ₹4.46 करोड़ की लागत से एक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण बीम स्तर तक किया गया था, लेकिन फंड की कमी के कारण यह पिछले साढ़े चार वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसी तरह, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की लड़कियों के लिए बनाए गए एक छात्रावास को उसके अलग-थलग स्थान के कारण उद्घाटन के बाद से कभी उपयोग नहीं किया गया, जिससे ₹1.98 करोड़ का खर्च व्यर्थ गया।
Frequently Asked Questions
1. CAG रिपोर्ट में किन मुख्य योजनाओं की खामियां पाई गईं?
मुख्य रूप से मनरेगा (MGNREGA) और जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में कमियां पाई गई हैं।
2. इंदिरा गांधी कॉलेज की जमीन क्यों अनुपयोगी रही?
₹13.46 करोड़ की यह जमीन केवल एक पहुंच मार्ग (approach road) की अनुपलब्धता के कारण 15 वर्षों से खाली पड़ी है।