पूर्व माओवादी नेता और सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति सदस्य कुर्सेंगा मोतीबाई उर्फ राधाक्का का आदिलाबाद में अंतिम संस्कार किया गया। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।

  • पूर्व माओवादी नेता राधाक्का का 55 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन।
  • आदिलाबाद जिले के लिंगुगुडा गांव में अंतिम संस्कार संपन्न।
  • वह सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति सदस्य और क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन की प्रमुख नेता थीं।

तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के लिंगुगुडा गांव में मंगलवार को पूर्व माओवादी नेता कुर्सेंगा मोतीबाई, जिन्हें राधाक्का के नाम से जाना जाता था, का अंतिम संस्कार किया गया। 55 वर्षीय राधाक्का का सोमवार शाम को आदिलाबाद के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

राधाक्का का जीवन संघर्षों और विचारधारा की लड़ाई से भरा रहा। वह आदिलाबाद ग्रामीण मंडल के पिप्पलधारी गांव की रहने वाली थीं। उन्होंने 1980 के दशक के मध्य में तत्कालीन प्रतिबंधित सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) में शामिल होकर अपने क्रांतिकारी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने सिरपुर और अन्य वन क्षेत्रों में भूमिगत रहकर काम किया और बाद में 1990 के दशक के अंत में उन्हें दंडकारण्य वन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष

राधाक्का ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन के प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई। वह अंततः सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति की सदस्य के रूप में उभरीं। उनका राजनीतिक कद आदिवासी आंदोलनों में काफी महत्वपूर्ण माना जाता था।

वर्ष 2017 में, पुलिस ने उन्हें पालवनचा के पास गिरफ्तार किया था जब वह इलाज के लिए खम्मम जा रही थीं। कुछ वर्षों तक जेल में रहने के बाद, उन पर लंबित मामलों में बरी होने के पश्चात उन्हें रिहा किया गया था। पिछले कुछ हफ्तों से वह अस्वस्थ चल रही थीं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि राधाक्का का निधन न केवल माओवादी आंदोलन के लिए बल्कि तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटना है। उनके निधन से उस दौर के नेतृत्व के एक युग का अंत हो गया है जो दशकों तक जंगलों में सक्रिय रहा।

राधाक्का का जीवन आदिवासी अधिकारों और सशस्त्र उग्रवाद के जटिल अंतर्संबंधों का एक प्रतीक रहा है।

उनके अंतिम संस्कार में आदिवासी और अन्य जन संगठनों के नेताओं के साथ-साथ पूर्व माओवादी नेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य पुल्लूरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना भी उपस्थित थे। कुमराम भीम आसिफाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अथराम सुगुना ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी।

Did You Know?: क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन का गठन आदिवासी महिलाओं के अधिकारों और वन क्षेत्रों में उनके सशक्तिकरण के लिए किया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: राधाक्का का निधन कैसे हुआ?
उत्तर: राधाक्का का निधन सोमवार शाम को आदिलाबाद के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ।

प्रश्न 2: वह किस संगठन से जुड़ी थीं?
उत्तर: वह सीपीआई (माओवादी) की राज्य समिति की सदस्य और क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन की प्रमुख नेता थीं।