एक स्थिर कम दबाव वाले क्षेत्र के कारण कोलकाता और दक्षिण बंगाल में भारी जलजमाव और ट्रैफिक संकट पैदा हो गया है, जिससे दैनिक आवागमन और स्कूल प्रभावित हुए हैं।

  • स्थिर कम दबाव प्रणाली के कारण कोलकाता और दक्षिण बंगाल में गंभीर जलजमाव।
  • कालाइकुंडा में सर्वाधिक 51 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि साल्ट लेक में 40 मिमी रही।
  • दार्जिलिंग और कालिम्पोंग सहित उप-हिमालयी जिलों में 4 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान।

मंगलवार सुबह राज्य की राजधानी कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में मूसलाधार बारिश ने सामान्य जीवन को पूरी तरह से बाधित कर दिया। इस मौसम परिवर्तन का मुख्य कारण गंगा पश्चिम बंगाल के ऊपर बना एक 'वेल-मार्क्ड' कम दबाव का क्षेत्र है, जो उत्तर तटीय ओडिशा और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी से सटा हुआ है। यह प्रणाली लगभग स्थिर रही, जिससे भारी मात्रा में वर्षा हुई और शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बारिश का वितरण काफी व्यापक था। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कालाइकुंडा में पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 51 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहरी क्षेत्रों की बात करें तो साल्ट लेक में 40 मिमी और कोलकाता शहर में 23 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा पानागढ़ (50 मिमी), बैरकपुर (43 मिमी) और कैनिंग (44 मिमी) में भी भारी बारिश दर्ज की गई।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न ड्रेनेज परियोजनाओं के बावजूद कोलकाता में बार-बार होने वाला जलजमाव शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाता है। कम दबाव के क्षेत्र के स्थिर रहने से बारिश की तीव्रता बढ़ गई, जिसने ऑफिस जाने वाले लोगों और छात्रों के लिए आवागमन को एक दुःस्वप्न बना दिया।

"तटीय बेल्ट पर कम दबाव के क्षेत्र का स्थिर रहना एक 'स्टॉलिंग इफेक्ट' पैदा करता है, जिससे इतनी अधिक बारिश होती है कि शहरी नालों की निकासी क्षमता कम पड़ जाती है।"

सबसे अधिक प्रभाव स्कूल जाने वाले बच्चों और दैनिक यात्रियों पर पड़ा। शहर की मुख्य सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं, जिससे ट्रैफिक की गति बेहद धीमी हो गई और कई जगहों पर लंबे जाम लग गए। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि यह प्रणाली बुधवार सुबह तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ सकती है।

आने वाले दिनों के लिए, मौसम कार्यालय ने उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार जैसे जिलों में 4 सितंबर तक भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

स्थान दर्ज बारिश (मिमी) प्रभाव का स्तर
कालाइकुंडा 51 मिमी उच्च
पानागढ़ 50 मिमी मध्यम-उच्च
साल्ट लेक 40 मिमी गंभीर (शहरी)
कोलकाता 23 मिमी गंभीर (ट्रैफिक)
क्या आप जानते हैं?: समुद्र के पास स्थित डेल्टा क्षेत्र होने के कारण कोलकाता स्वाभाविक रूप से मानसून के दौरान जलजमाव के प्रति संवेदनशील है, खासकर जब भारी बारिश के साथ हाई टाइड (ज्वार) आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: दक्षिण बंगाल में भारी बारिश का पूर्वानुमान कब तक है?
IMD के अनुसार, वर्तमान कम दबाव प्रणाली बुधवार सुबह तक हट सकती है, हालांकि कुछ हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है।

प्रश्न 2: किन उत्तरी जिलों में जोखिम अधिक है?
दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार में 4 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना है।