लिंगरायण किसान और श्रमिक कल्याण संघ ने कावेरी बेसिन के जल साझाकरण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एलबीपी नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया को अवैध बताया है।
- लिंगरायण किसानों ने 15 अगस्त से एलबीपी नहर में अवैध जल आपूर्ति का आरोप लगाया है।
- दावा है कि बिना सरकारी आदेश के कुंदाह और पाइकारा जलाशयों से 2 टीएमसी फीट पानी निकाला गया।
- संघ का कहना है कि लिंगरायण नहर के लिए निर्धारित नदी के प्राकृतिक प्रवाह को गलत तरीके से मोड़ा गया।
इरोड के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लिंगरायण किसान और श्रमिक कल्याण संघ ने आरोप लगाया है कि भवानीसागर बांध से लोअर भवानी प्रोजेक्ट (LBP) नहर में 'विशेष आपूर्ति' के रूप में पानी छोड़ना पूरी तरह से अवैध था। संघ का दावा है कि 15 अगस्त से शुरू हुई यह प्रक्रिया कावेरी बेसिन में जल साझाकरण के निर्धारित नियमों का खुला उल्लंघन है।
संघ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों पर 15 अगस्त की शाम 5 बजे से पानी छोड़ा गया, लेकिन इसके लिए कोई अलग से सरकारी आदेश (GO) जारी नहीं किया गया था। आरोप है कि एलबीपी नहर को 'विशेष वेटिंग' प्रदान करने के लिए कुंदाह और पाइकारा जलविद्युत परियोजना जलाशयों से लगभग 2 टीएमसी फीट पानी निकाला गया। नियमों के अनुसार, इन जलाशयों का पानी केवल तभी निकाला जा सकता है जब पहली या दूसरी फसल के मौसम में गंभीर पानी की कमी हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल स्थानीय स्तर का झगड़ा नहीं है, बल्कि तमिलनाडु में जल सुरक्षा को लेकर व्याप्त गहरे तनाव का प्रतिबिंब है। जब बिना किसी पारदर्शी कानूनी ढांचे के पानी को एक नहर प्रणाली से दूसरी प्रणाली में मोड़ दिया जाता है, तो यह उन हजारों छोटे किसानों की आजीविका को खतरे में डालता है जो लिंगरायण नहर के ऐतिहासिक जल अधिकारों पर निर्भर हैं।
संघ ने आगे आरोप लगाया कि कावेरी बेसिन के विनियमन के नियमों के संग्रह (Compendium of Rules) का उल्लंघन करते हुए, भवानी नदी के उस प्राकृतिक प्रवाह को एलबीपी नहर की ओर मोड़ दिया गया जो कानूनी रूप से लिंगरायण नहर के लिए था। 16 जून से अब तक, जलाशयों से लिए गए 2 टीएमसी फीट और मोड़े गए प्राकृतिक प्रवाह को मिलाकर, एलबीपी नहर को 4 टीएमसी फीट से अधिक पानी की आपूर्ति की गई है।
"सरकारी आदेश के बिना पानी का विचलन कावेरी बेसिन नियमों की कानूनी पवित्रता को कमजोर करता है और क्षेत्र में दीर्घकालिक कृषि अस्थिरता का जोखिम पैदा करता है।"
प्रशासनिक लापरवाही का जिक्र करते हुए संघ ने कहा कि यह विशेष आपूर्ति सोमवार शाम 5 बजे समाप्त हो जानी चाहिए थी, लेकिन बिना किसी नए आदेश के इसे निर्धारित समय के बाद भी जारी रखा गया, जिससे इस पूरी प्रक्रिया की अवैधता और स्पष्ट हो जाती है।
| विशेषता | लिंगरायण संघ का दावा | मानक नियम |
|---|---|---|
| प्राधिकरण | केवल कलेक्टर का निर्देश | औपचारिक सरकारी आदेश (GO) अनिवार्य |
| जलाशय उपयोग | एलबीपी के लिए विशेष आपूर्ति | केवल फसल सीजन की कमी के दौरान |
| पानी की मात्रा | 4 टीएमसी फीट से अधिक का विचलन | प्राकृतिक प्रवाह/बेसिन नियमों पर आधारित |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: लिंगरायण किसान संघ विरोध क्यों कर रहा है?
उनका मानना है कि उनकी नहर के लिए निर्धारित पानी को बिना उचित सरकारी अनुमति और नियमों के उल्लंघन के एलबीपी नहर में मोड़ दिया गया।
प्रश्न 2: पानी की आपूर्ति के लिए किन जलाशयों का उपयोग किया गया?
एलबीपी नहर को पानी देने के लिए कुंदाह और पाइकारा जलविद्युत परियोजना जलाशयों का उपयोग किया गया।