केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना को स्थगित कर दिया है, क्योंकि कई समुदाय पहले 1951 के आधार पर NRC लागू करने की मांग कर रहे हैं। यह निर्णय राज्य में बढ़ते जातीय तनाव और आगामी विधानसभा चुनावों के बीच लिया गया है।

  • केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना (Census) के संचालन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है।
  • मेइतेई और नागा समुदायों सहित कई नागरिक संगठनों ने पहले NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की मांग की है।
  • कुकी-जो परिषद ने जनगणना का समर्थन किया था, जबकि अन्य समूहों ने इसे 'अवैध प्रवासियों' को वैध करने के प्रयास के रूप में देखा।

मणिपुर में 1 सितंबर से शुरू होने वाली जनगणना प्रक्रिया को केंद्र सरकार ने अंतिम समय पर स्थगित कर दिया है। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मणिपुर के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। सरकार का मानना है कि राज्य में पहले से ही कुकी-मेइतेई और कुकी-नागा संघर्ष जारी है, और ऐसे में जनगणना जैसी संवेदनशील प्रक्रिया नए तनाव पैदा कर सकती है।

NRC की मांग और समुदायों का विरोध

इम्फाल घाटी में बहुसंख्यक मेइतेई समुदाय और कई नागरिक संगठनों (CSOs) ने इस बात पर कड़ा विरोध जताया कि जनगणना से पहले राज्य का NRC तैयार किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC बनाया जाए ताकि 'अवैध प्रवासियों' की पहचान की जा सके। मेइतेई पांगल्स (मुस्लिम) और नागा समुदायों ने भी इस मुहिम का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि बांग्लादेश, म्यांमार और मिजोरम से आए प्रवासियों ने राज्य की जनसांख्यिकी को बदल दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल डेटा संग्रह का नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व और भूमि अधिकारों का है। मणिपुर में जनगणना का सीधा संबंध 'परिसीमन' (Delimitation) से है। यदि जनसंख्या के आंकड़े बदलते हैं, तो विधानसभा सीटों का वितरण बदल जाएगा, जिससे सत्ता का संतुलन प्रभावित होगा। यही कारण है कि विभिन्न जातीय समूह अपनी जनसंख्या की स्थिति को लेकर अत्यधिक संवेदनशील हैं।

दूसरी ओर, कुकी-जो परिषद ने जनगणना का समर्थन किया था। उनका तर्क था कि एक निष्पक्ष जनगणना यह साबित करेगी कि कुकी आबादी के बारे में किए जा रहे दावे गलत हैं और वे अवैध प्रवासी नहीं हैं। कुकी समुदाय को डर है कि 1951 के आधार पर NRC लागू करने से उन्हें गलत तरीके से बाहर किया जा सकता है।

जनगणना और NRC के बीच का यह टकराव मणिपुर के गहरे जातीय अविश्वास और पहचान के संकट को दर्शाता है, जहाँ डेटा अब एक राजनीतिक हथियार बन गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ: जब पहले भी जनगणना रुकी

भारत में यह पहली बार नहीं है जब किसी विशिष्ट क्षेत्र में जनगणना स्थगित की गई हो। 1981 में असम में विदेशी नागरिकता विवाद के कारण इसे रोका गया था। इसी तरह, 1991 में जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद और कश्मीरी पंडितों के पलायन के कारण जनगणना प्रभावित हुई थी। 2021 की राष्ट्रीय जनगणना भी कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित की गई थी।

पक्ष/समुदाय रुख (Census/NRC) मुख्य तर्क
मेइतेई/नागा पहले NRC, फिर Census अवैध प्रवासियों की पहचान और मूल निवासियों का संरक्षण।
कुकी-जो Census का समर्थन जनसंख्या की वास्तविकता साबित करना और निष्पक्ष परिसीमन।
क्या आप जानते हैं?: मणिपुर के कुछ नागरिक संगठनों का दावा है कि पिछले 130 वर्षों में मेइतेई पांगल्स की जनसंख्या में 4,814% की वृद्धि हुई है, जो कि अन्य मूल समुदायों की तुलना में काफी अधिक है।

Frequently Asked Questions

1. मणिपुर में जनगणना स्थगित करने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण विभिन्न समुदायों द्वारा पहले NRC लागू करने की मांग और राज्य में मौजूदा जातीय हिंसा के बीच शांति बनाए रखना है।

2. 1951 के आधार वर्ष की मांग क्यों की जा रही है?
विरोध करने वाले समूहों का मानना है कि 1951 के रिकॉर्ड का उपयोग करने से उन लोगों की पहचान करना आसान होगा जो बाद में अवैध रूप से राज्य में बसे।