केंद्र सरकार ने मणिपुर में 2027 की जनगणना को स्थगित कर दिया है। राज्य में मेइती और नागा समूहों द्वारा जनसंख्या गणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की पुरजोर मांग की जा रही है।

  • केंद्र सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह और मणिपुर के मुख्यमंत्री की बैठक के बाद 2027 की जनगणना को स्थगित किया।
  • मेइती और नागा समूहों का तर्क है कि अवैध प्रवासियों के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव आया है।
  • विस्थापन और परिसीमन (Delimitation) की चिंताएं इस विवाद के मुख्य केंद्र में हैं।

संघीय सरकार ने सोमवार को मणिपुर में 2027 की जनगणना को स्थगित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मणिपुर के राज्यपाल, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। राज्य सरकार के अनुसार, यह निर्णय इस मांग के बाद आया है कि जनगणना केवल राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के कार्यान्वयन के बाद ही आयोजित की जानी चाहिए।

जनगणना का विरोध क्यों हो रहा है?

मणिपुर में जनगणना के विरोध के पीछे तीन प्रमुख और आपस में जुड़े कारण हैं। पहला कारण नागरिकता और जनसांख्यिकीय परिवर्तन है। घाटी और नागा बहुल पहाड़ी जिलों के नागरिक समाज समूहों का आरोप है कि म्यांमार और अन्य स्थानों से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है, जिसने राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना को बदल दिया है। उनका मानना है कि जनसंख्या दर्ज करने से पहले भारतीय नागरिकों और अवैध प्रवासियों के बीच अंतर करना अनिवार्य है।

दूसरा बड़ा कारण मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के कारण हुआ विस्थापन है। हजारों लोग अभी भी अपने मूल घरों से दूर राहत शिविरों में रह रहे हैं। मेइती समूहों का तर्क है कि यदि इस स्थिति में जनगणना की गई, तो यह वास्तविक जनसंख्या पैटर्न के बजाय विस्थापन के परिणामों को दर्ज करेगी।

तीसरा कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व और परिसीमन है। जनगणना के आंकड़े भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का आधार बनेंगे। मणिपुर में 1970 के दशक के बाद से कोई नया परिसीमन लागू नहीं हुआ है, जिससे विधानसभा के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the demand for NRC in Manipur is not merely an administrative request but a strategic move to prevent potential political shifts in the state assembly. By linking NRC to the Census, ethnic groups are attempting to secure their political dominance by excluding those they deem 'illegal immigrants' from the upcoming delimitation process.

"The intersection of ethnic identity and electoral geography in Manipur makes the Census a high-stakes political tool rather than a simple statistical exercise."

यह मांग नई नहीं है। जून 2022 में, Coordinating Committee on Manipur Integrity (COCOMI) और United Naga Council (UNC) ने संयुक्त रूप से NRC की मांग की थी। अगस्त 2022 में मणिपुर विधानसभा ने भी इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था। म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद वहां से आए शरणार्थियों ने इन चिंताओं को और अधिक तीव्र कर दिया है।

दूसरी ओर, कुकी-ज़ो समूहों ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। कुकी-ज़ो काउंसिल का तर्क है कि NRC एक राष्ट्रीय प्रक्रिया है और किसी भी राज्य सरकार या समुदाय द्वारा इसे एकतरफा रूप से शुरू करना अनुचित और समय से पहले है।

पक्षमुख्य मांग/तर्कमुख्य चिंता
मेइती/नागा समूहपहले NRC, फिर जनगणनाअवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव
कुकी-ज़ो समूहNRC का विरोधनागरिकों का गलत वर्गीकरण और भेदभाव
क्या आप जानते हैं?: मणिपुर के पहाड़ी जिलों में 2001 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर 250.9% दर्ज की गई थी, जो घाटी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है।

Frequently Asked Questions

1. मणिपुर में जनगणना क्यों स्थगित की गई?
केंद्र ने इसे इसलिए स्थगित किया क्योंकि राज्य के कई समूहों की मांग है कि पहले NRC लागू किया जाए ताकि अवैध प्रवासियों को अलग किया जा सके।

2. परिसीमन (Delimitation) का जनगणना से क्या संबंध है?
जनगणना के आंकड़ों का उपयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने के लिए किया जाता है, जिससे राजनीतिक सीटों का वितरण बदल सकता है।