प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पानी को क्षेत्र की 'जीवनधारा' बताया है और भारत द्वारा हेग के फैसले को खारिज करने के बाद इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील की है।

  • पीएम शहबाज शरीफ ने पानी को रणनीतिक हथियार बनाने के खिलाफ चेतावनी दी।
  • यह बयान भारत द्वारा हेग (The Hague) के फैसले को मानने से इनकार करने के बाद आया है।
  • सिंधु जल संधि की व्याख्या को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।

किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में एक उच्च-स्तरीय संबोधन के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीमा पार जल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। शरीफ ने जोर देकर कहा कि पानी इस क्षेत्र की 'जीवनधारा' (Lifeblood) है और इसे राजनीतिक या रणनीतिक लाभ के लिए कभी भी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच गहरे होते राजनयिक मतभेदों के बीच आई है। भारत ने हाल ही में सिंधु नदी प्रणाली पर जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित हेग (The Hague) के एक फैसले को खारिज कर दिया था। इस इनकार ने पाकिस्तान के उन डर को बढ़ा दिया है कि भारत अपने पड़ोसी पर दबाव डालने के लिए पानी के प्रवाह में हेरफेर कर सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि कई युद्धों के बावजूद टिकी रही, लेकिन वर्तमान घर्षण एक खतरनाक बदलाव का संकेत है। पानी को राजनीतिक उपकरण के बजाय मानवीय आवश्यकता के रूप में पेश करके, पाकिस्तान इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा है, ताकि भारत के एकतरफा रुख के बावजूद संधि की अखंडता सुनिश्चित की जा सके।

दक्षिण एशिया में पानी का शस्त्रीकरण क्षेत्रीय कृषि स्थिरता को पूरी तरह नष्ट कर सकता है और सीमा तनाव को एक अस्तित्वगत संकट में बदल सकता है।

जल विवाद के अलावा, पीएम शरीफ की बिश्केक यात्रा रणनीतिक मुलाकातों से भरी रही। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की, जहां उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच संयम बरतने का आग्रह किया, जो क्षेत्रीय शक्तियों और वैश्विक महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाने के पाकिस्तान के प्रयास को दर्शाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सिंधु जल संधि (IWT) 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित की गई थी। इसके तहत तीन पूर्वी नदियों का अधिकार भारत को और तीन पश्चिमी नदियों का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया। हालांकि, पश्चिमी नदियों पर भारतीय बांधों के डिजाइन और संचालन को लेकर अक्सर विवाद होता है, जिसे पाकिस्तान संधि की भावना का उल्लंघन मानता है।

विशेषताभारत का पक्षपाकिस्तान का पक्ष
हेग का फैसलागैर-बाध्यकारी/गलत मानकर खारिज कियासख्त पालन की मांग
जल उपयोगजलविद्युत क्षमता का अधिकतम उपयोगप्रवाह में हेरफेर की आशंका
क्या आप जानते हैं?: सिंधु जल संधि को दुनिया की सबसे सफल जल-साझाकरण संधियों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बड़े युद्धों के बावजूद कायम रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल संधि क्या है?

यह 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-वितरण संधि है।

पीएम शहबाज शरीफ ने 'शस्त्रीकरण' (Weaponization) शब्द का उपयोग क्यों किया?

उनका इशारा इस बात की ओर है कि कोई देश दूसरे देश पर राजनीतिक दबाव डालने के लिए पानी के प्रवाह को रोक सकता है या उसमें बदलाव कर सकता है।