1.3 अरब डॉलर की भारी लागत के बावजूद, नासा और इसरो का NISAR मिशन नेपाल की त्रासदी की चेतावनी देने में विफल रहा। अब इस महंगे प्रोजेक्ट की उपयोगिता और दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- NISAR मिशन की कुल लागत लगभग 1.3 अरब डॉलर है, जिसे NASA और ISRO ने मिलकर विकसित किया है।
- नेपाल में आई भीषण त्रासदी के दौरान यह सिस्टम समय पर चेतावनी देने में पूरी तरह विफल रहा।
- विशेषज्ञों ने सैटेलाइट के डेटा प्रोसेसिंग और रिज़ॉल्यूशन पर सवाल उठाए हैं।
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन को पृथ्वी के अवलोकन में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा था। इस सैटेलाइट का उद्देश्य पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों की निगरानी करना था, विशेष रूप से हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। लेकिन नेपाल में हुई हालिया त्रासदी ने तकनीकी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है।
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य भूस्खलन, भूकंप और ग्लेशियर फटने जैसी घटनाओं का उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करना था। दोहरी-आवृत्ति रडार सिस्टम के साथ, इसे विवर्तनिक बदलावों (tectonic shifts) की निगरानी के लिए दुनिया का सबसे उन्नत उपकरण बताया गया था। इसके बावजूद, जब नेपाल में आपदा आई, तो यह सिस्टम खामोश रहा, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विफलता केवल एक तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सैटेलाइट डेटा को समय पर चेतावनी में बदलने का तंत्र कितना कमजोर है। हार्डवेयर कितना भी आधुनिक क्यों न हो, यदि डेटा प्रोसेसिंग में देरी होती है और स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ समन्वय नहीं होता, तो वह बेकार है।
भूगर्भीय बदलाव का पता लगाने और जनता को चेतावनी जारी करने के बीच का समय ही वह बिंदु है जहाँ अधिकांश हाई-टेक सिस्टम विफल हो जाते हैं।
ऐतिहासिक रूप से, हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों का केंद्र रहा है। RISAT जैसे पिछले मिशनों ने कुछ हद तक निगरानी प्रदान की थी, लेकिन NISAR से उम्मीद थी कि वह 'ब्लाइंड स्पॉट्स' को खत्म कर देगा। वर्तमान विफलता यह संकेत देती है कि अत्यधिक ऊंचाई और घने बादलों के बीच L-बैंड और S-बैंड रडार संघर्ष कर सकते हैं।
आलोचकों का तर्क है कि 1.3 अरब डॉलर के खर्च में एक मजबूत ग्राउंड-लेवल अलर्ट सिस्टम भी शामिल होना चाहिए था। सैटेलाइट की कक्षीय क्षमताओं और प्रभावित आबादी तक चेतावनी पहुँचने के बीच का अंतर आपदा विज्ञान की 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' की विफलता को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: NISAR सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर 1: इसका उद्देश्य हर 12 दिन में पूरी दुनिया का मानचित्रण करना है ताकि बर्फ की चादरों, वन बायोमास और प्राकृतिक खतरों की निगरानी की जा सके।
प्रश्न 2: यह नेपाल को चेतावनी देने में क्यों विफल रहा?
उत्तर 2: शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग में समस्या और विशिष्ट स्थानीय क्षेत्रों के लिए चेतावनी प्रोटोकॉल की कमी मुख्य कारण रहे।