प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी पूरी कर भारत लौट आए हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया और वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण संवाद किए।
- प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की वकालत की।
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में भारत ने आतंकवाद पर दोहरा मानदंड अपनाने की चेतावनी दी।
- पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद अपने गृह नगर भारत वापस लौट आए हैं। इस उच्च-स्तरीय कूटनीतिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाना था। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की सक्रियता ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
शिखर सम्मेलन के सबसे चर्चित क्षणों में से एक पीएम मोदी का आतंकवाद पर दिया गया बयान था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई 'दोहरा मानदंड' नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अपनी नीतियों में बदलाव लाना होगा, अन्यथा वैश्विक समुदाय का समर्थन पाना कठिन होगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पीएम मोदी का यह कड़ा रुख न केवल पाकिस्तान को चेतावनी है, बल्कि यह एससीओ के अन्य सदस्य देशों को यह संदेश देता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह कम होती जा रही है।
"आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता केवल भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे ठोस कार्रवाई में बदलना अनिवार्य है।"
इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रूस-यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित था। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान की अपील की। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि भारत की अपनी विदेश नीति और वैश्विक दबावों के बीच इस शांति पहल को लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।
ऐतिहासिक रूप से, एससीओ एक ऐसा मंच रहा है जहाँ चीन और रूस का दबदबा रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने इस संगठन के भीतर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। भारत अब केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि एक एजेंडा-सेटर के रूप में उभर रहा है, जो विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की बात करता है।
Frequently Asked Questions
1. एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य संदेश क्या था?
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता और वैश्विक शांति के लिए संवाद पर जोर दिया।
2. पीएम मोदी ने पुतिन से क्या अपील की?
उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और कूटनीति के माध्यम से शांति स्थापित करने का आग्रह किया।