रामनाथपुरम जिला प्रशासन के पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी जर्जर इमारतों के तत्काल जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिससे कर्मचारियों में सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश है।
- रामनाथपुरम में सरकारी कर्मचारियों ने पुराने कलेक्ट्रेट भवनों के गंभीर रूप से जर्जर होने के कारण उनके तत्काल जीर्णोद्धार की मांग की है।
- इन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भवनों में मुख्य शिक्षा कार्यालय, महिला न्यायालय और जिला कोषालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय संचालित होते हैं।
- लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार आवेदन सौंपने के बाद भी अभी तक मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया है।
तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिला प्रशासन के पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। दो दशकों से अधिक समय से बिना किसी बड़े रखरखाव के खड़ी यह प्रशासनिक इमारत अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। लगातार तेज धूप और भारी बारिश के कारण इसके ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे यहां काम करने वाले कर्मचारियों और प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
तमिलनाडु सरकारी कर्मचारी संघ (TNGEA) के जिला अध्यक्ष एल. विजयरामलिंगम ने बताया कि इस इमारत में मुख्य शिक्षा कार्यालय, जिला शिक्षा कार्यालय, महिला न्यायालय, सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय और राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण कार्यालय जैसे कई अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी विभाग संचालित होते हैं। नियमित रखरखाव के अभाव में इन सभी कार्यालयों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है।
इमारत के भीतर की स्थिति और भी बदतर हो चुकी है। आंतरिक पानी की पाइपलाइनें पूरी तरह से फट चुकी हैं, जिससे लगातार हो रहे रिसाव के कारण पानी दीवारों में रिस रहा है। इस निरंतर रिसाव ने कंक्रीट के ढांचे को अंदर से कमजोर कर दिया है और दीवारों पर जंगली पौधों के उगने से दरारें और चौड़ी हो गई हैं। पानी के लगातार टपकने से महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के भी नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जिला स्तर पर प्रशासनिक बुनियादी ढांचे की उपेक्षा केवल एक भौतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक दक्षता और लोक सेवकों के मनोबल को प्रभावित करती है। जब बुनियादी सरकारी कार्यालय ही असुरक्षित होंगे, तो वहां से मिलने वाली सार्वजनिक सेवाएं भी प्रभावित होंगी। यह मामला सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर करता है, जहां बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद कार्रवाई फाइलों में दबी रह जाती है।
"सार्वजनिक प्रशासनिक भवनों के नियमित रखरखाव की अनदेखी करना न केवल सैकड़ों कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालता है, बल्कि भविष्य में पुनर्निर्माण की लागत को भी कई गुना बढ़ा देता है।"
विजयरामलिंगम ने यह भी रेखांकित किया कि नए कलेक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित एक अन्य इमारत, जिसमें जिला कोषालय, सहकारी विभाग के संयुक्त निदेशक का कार्यालय, समाज कल्याण विभाग, पंचायत संघ लेखा परीक्षा कार्यालय, कृषि इंजीनियरिंग कार्यालय और एक डाकघर स्थित हैं, की स्थिति भी उतनी ही दयनीय है। इन दोनों बड़े परिसरों के जीर्णोद्धार के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार लिखित प्रतिनिधित्व भेजा गया है, लेकिन अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
| भवन का स्थान / नाम | प्रमुख संचालित कार्यालय | पहचानी गई मुख्य संरचनात्मक समस्याएं |
|---|---|---|
| पुराना कलेक्ट्रेट भवन | मुख्य शिक्षा कार्यालय, महिला न्यायालय, आबकारी कार्यालय | पाइपलाइन फटना, पानी का गंभीर रिसाव, दीवारों में गहरी दरारें, पौधों का उगना |
| सामने स्थित कोषालय भवन | कोषालय, समाज कल्याण, सहकारी विभाग, डाकघर | अत्यधिक जर्जर स्थिति, नियमित पुताई का अभाव, संरचनात्मक घिसावट |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: रामनाथपुरम कलेक्ट्रेट भवनों की हालत इतनी खराब क्यों है?
उत्तर: पिछले दो दशकों से इन भवनों का कोई बड़ा रखरखाव या मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। आंतरिक पाइपलाइनों के फटने और पानी के रिसाव ने इसकी कंक्रीट संरचना को बेहद कमजोर कर दिया है।
प्रश्न 2: क्या लोक निर्माण विभाग (PWD) को इस संबंध में सूचित किया गया है?
उत्तर: हां, तमिलनाडु सरकारी कर्मचारी संघ द्वारा पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को कई बार लिखित ज्ञापन और प्रतिनिधित्व सौंपे गए हैं, लेकिन अभी तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है।