वेल्लोर जिले के सूखे क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले 19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन गुफ्राबाद सिंचाई टैंक के पुनरुद्धार का काम शुरू हो गया है। इस परियोजना से 12 गांवों के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

  • 19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन गुफ्राबाद टैंक का पुनरुद्धार कार्य शुरू।
  • 32 एकड़ में फैला यह टैंक 12 कृषि गांवों के लिए जीवन रेखा है।
  • गाद निकालने (Desilting) के काम से जल भंडारण क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
  • पर्नामबुट पंचायत यूनियन के सूखे इलाकों में पानी की समस्या होगी हल।

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। मंगलवार को कलेक्टर पी.एस. लीला एलेक्स ने पर्नामबुट पंचायत यूनियन के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गुफ्राबाद सिंचाई टैंक के पुनरुद्धार कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया। दशकों से उपेक्षित इस टैंक को फिर से जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि आगामी उत्तर-पूर्वी मानसून का पूरा लाभ उठाया जा सके।

गुफ्राबाद टैंक केवल एक जल निकाय नहीं है, बल्कि यह 19वीं सदी के उत्तरार्ध में अंग्रेजों द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत है। 32 एकड़ में फैला यह टैंक क्षेत्र के 10 छोटे सिंचाई टैंकों में से सबसे बड़ा है। जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) के अधिकारियों के अनुसार, इस टैंक का पुनरुद्धार क्षेत्र के सबसे शुष्क इलाकों में से एक के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस टैंक का पुनरुद्धार केवल जल संरक्षण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वर्तमान में, टैंक में हर साल औसतन 45 सेंटीमीटर गाद जमा हो जाती है, जिससे इसकी भंडारण क्षमता कम हो गई है। गाद निकालने के इस कार्य से पहाड़ियों से आने वाले अतिरिक्त वर्षा जल को रोकने की क्षमता बढ़ेगी।

गाद निकालने की प्रक्रिया से न केवल जल स्तर सुधरेगा, बल्कि यह भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस परियोजना के तहत, गुडलपल्ली रिजर्व फॉरेस्ट से टैंक तक आने वाले 1.2 किमी लंबे जल चैनल की भी सफाई की जाएगी। इससे मानसून के दौरान पानी के रिसाव को रोका जा सकेगा। यह टैंक डी.डी. मोटूर, कमलपुरम, सेरईकरनपत्ती, पुसीकरपत्ती और गुफ्राबाद सहित 12 कृषि गांवों के लिए पेयजल और सिंचाई का मुख्य स्रोत है।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस टैंक के पुनर्जीवित होने से लगभग 250 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित होगी, जहाँ मुख्य रूप से धान, मूंगफली और केले की खेती की जाती है। इसके अलावा, स्थानीय पंचायतों द्वारा निर्मित 14 से अधिक बोरवेल भी इसी टैंक के जल स्तर पर निर्भर हैं।

विशेषताविवरण
कुल क्षेत्रफल32 एकड़
निर्माण काल19वीं शताब्दी (ब्रिटिश काल)
लाभान्वित गांव12 गांव
मुख्य फसलेंधान, मूंगफली, केला
Did You Know?: गुफ्राबाद टैंक क्षेत्र के 10 छोटे सिंचाई टैंकों में भंडारण क्षमता के मामले में सबसे बड़ा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: गुफ्राबाद टैंक के पुनरुद्धार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: मुख्य उद्देश्य गाद (silt) हटाकर टैंक की जल भंडारण क्षमता को बढ़ाना है ताकि मानसून के पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

प्रश्न 2: इस परियोजना से कितने किसानों को लाभ होगा?
उत्तर: इससे 12 गांवों के किसानों को लाभ होगा और लगभग 250 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित होगी।