बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ रणनीतिक चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर दिया।
- पीएम मोदी ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन हिस्सा लिया।
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय संवाद।
- सीमा पार आतंकवाद और टेरर फंडिंग के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील।
- कनेक्टिविटी परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की मांग।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। आधिकारिक स्वागत समारोह और सदस्य देशों के नेताओं के साथ फोटो सत्र के बाद, काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की बैठक शुरू हुई, जो एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच का उपयोग भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित करने के लिए किया। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा और कनेक्टिविटी के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के 'दोहरे मानदंड' (Double Standards) को स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों से आह्वान किया कि सीमा पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और कट्टरपंथ के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन और रूस के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक संवाद का अवसर प्रदान करती है। भारत का जोर इस बात पर है कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स (जैसे कि बुनियादी ढांचा विकास) केवल तभी सफल हो सकते हैं जब वे किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन न करें। यह सीधे तौर पर चीन द्वारा समर्थित परियोजनाओं की ओर एक कूटनीतिक इशारा है।
"SCO जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली वैश्विक दक्षिण (Global South) का नेतृत्व करने और यूरेशियाई राजनीति में संतुलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा और उनके अधिकारों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया, जो वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। उन्होंने सदस्य राष्ट्रों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करें और संकट के समय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
ऐतिहासिक रूप से, एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी और भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना था। भारत ने हमेशा से इस संगठन को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक उपकरण माना है, बशर्ते कि सदस्य देश एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करें।
Frequently Asked Questions
1. एससीओ शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और आतंकवाद का मुकाबला करना है।
2. कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भारत की क्या चिंता है?
भारत चाहता है कि कोई भी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन न करे।