सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में 'टोटलाइजर' मशीनों के उपयोग पर केंद्र सरकार का रुख जानने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि इससे EVM पर जनता का भरोसा कम हो सकता है और पारदर्शिता घट सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टोटलाइजर के उपयोग पर प्रतिक्रिया मांगी है।
  • चुनाव आयोग का तर्क है कि इससे बूथ-वार पारदर्शिता कम होगी और विवाद बढ़ेंगे।
  • अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का दावा है कि टोटलाइजर से मतदाताओं की गोपनीयता सुरक्षित रहेगी।
  • वर्तमान में टोटलाइजर के उपयोग के लिए कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से 'टोटलाइजर' (Totaliser) मशीनों के उपयोग पर स्टैंड मांगा है। ये मशीनें कई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के कंट्रोल यूनिट्स को एक साथ जोड़कर परिणामों का समेकित डेटा प्रदान करती हैं, जिससे व्यक्तिगत बूथ के रुझान सामने नहीं आते।

यह मामला अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि टोटलाइजर का उपयोग करने से व्यक्तिगत मतदाताओं की गोपनीयता बनी रहेगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले संभावित प्रतिशोध या उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा। उनके अनुसार, वर्तमान प्रणाली में बूथ-वार रुझान आने से राजनीतिक दल पहचान लेते हैं कि किस क्षेत्र में उनके खिलाफ मतदान हुआ है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कानूनी लड़ाई केवल तकनीक की नहीं, बल्कि 'गोपनीयता बनाम पारदर्शिता' की है। जहां एक ओर मतदाता की गोपनीयता महत्वपूर्ण है, वहीं चुनाव आयोग का मानना है कि बूथ-वार डेटा ही चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ है। यदि इस डेटा को छिपाया गया, तो चुनावी परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

"लोकतांत्रिक वैधता की बुनियाद जनता का विश्वास है; किसी भी नए अनियंत्रित तंत्र का प्रवेश इस विश्वास को खतरे में डाल सकता है।"

दूसरी ओर, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि मौजूदा समय में जब EVM की अखंडता पर पहले से ही सवाल उठाए जाते हैं, ऐसे में एक नई और अनियमित मशीन (टोटलाइजर) लाने से जनता के बीच भ्रम और विवाद और बढ़ सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में और न ही चुनाव संचालन नियम, 1961 में टोटलाइजर के उपयोग का कोई प्रावधान है।

चुनाव आयोग ने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान में फॉर्म 17C के माध्यम से मतदान और गिनती की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उम्मीदवार और उनके एजेंट बूथ-वार मिलान कर सकते हैं। टोटलाइजर के आने से यह 'वन-टू-वन' मिलान समाप्त हो जाएगा, जिससे तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटियों को पहचानना असंभव हो जाएगा।

विशेषतावर्तमान EVM प्रणालीटोटलाइजर प्रणाली
डेटा आउटपुटबूथ-वार विस्तृत परिणामसमेकित (Aggregate) परिणाम
पारदर्शिताफॉर्म 17C द्वारा उच्च सत्यापनकम सत्यापन क्षमता
गोपनीयताबूथ स्तर पर रुझान स्पष्टव्यक्तिगत मतदाता अधिक सुरक्षित
कानूनी स्थितिपूर्णतः कानूनी और विनियमितकानूनी ढांचे का अभाव

आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों का भी इस विचार के प्रति नकारात्मक रुख है। 6 राष्ट्रीय दलों में से 3 और 29 राज्य दलों में से 18 ने टोटलाइजर के विचार का विरोध किया है। केवल भारत के विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में इसके चयनात्मक उपयोग का सुझाव दिया था।

क्या आप जानते हैं?: एक टोटलाइजर मशीन एक बार में 14 पोलिंग स्टेशनों के कंट्रोल यूनिट्स को केबल के जरिए जोड़कर एक साथ परिणाम दे सकती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: टोटलाइजर मशीन क्या है?
यह एक ऐसी मशीन है जो कई EVM कंट्रोल यूनिट्स से डेटा एकत्र कर एक कुल योग (Total) दिखाती है, जिससे अलग-अलग बूथों के वोट रुझान छिप जाते हैं।

प्रश्न 2: चुनाव आयोग इसके खिलाफ क्यों है?
आयोग का मानना है कि इससे पारदर्शिता कम होगी, फॉर्म 17C का मिलान नहीं हो पाएगा और EVM की विश्वसनीयता पर नए विवाद खड़े होंगे।