गृह मंत्रालय ने 17 नवंबर तक विशाखापट्टनम स्टील प्लांट (RINL) से CISF की पूरी वापसी को मंजूरी दे दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह फैसला सुरक्षा जरूरतों में कमी के कारण नहीं, बल्कि कंपनी के गहरे वित्तीय संकट का परिणाम है।

  • CISF 17 नवंबर 2026 तक विशाखापट्टनम स्टील प्लांट से पूरी तरह बाहर हो जाएगा।
  • कुल 1,331 पदों (सुरक्षा और अग्नि विंग) को हटाया जा रहा है।
  • RINL के पास कच्चे माल (लौह अयस्क) के अपने खदानों की कमी है, जिससे लागत बढ़ गई है।
  • गृह मंत्रालय ने CISF को बाहर निकलने से पहले सभी बकाया राशि वसूलने का निर्देश दिया है।

विशाखापट्टनम स्टील प्लांट (VSP), जिसे राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) के नाम से जाना जाता है, एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। 27 जनवरी 2021 को कैबिनेट समिति ने इसके 100% रणनीतिक विनिवेश को मंजूरी दी थी, जिसके बाद से प्लांट की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हालांकि, श्रमिक संघों और 'विशाखा उक्कू परिरक्षण पोरटा समिति' (VUPPC) के कड़े विरोध के कारण निजीकरण की प्रक्रिया अब तक रुकी हुई है।

हालिया घटनाक्रम में, गृह मंत्रालय ने CISF अधिनियम की धारा 14(2) का उपयोग करते हुए बल की पूरी वापसी को मंजूरी दे दी है। इस आदेश के तहत 1,033 सुरक्षा विंग और 298 फायर विंग के कर्मियों को हटाया जाएगा। यह किसी भी प्रमुख स्टील PSU से CISF का पहला पूर्ण निष्कासन है, जो इस औद्योगिक इकाई की नाजुक स्थिति को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि CISF का जाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह RINL की वित्तीय अक्षमता का प्रमाण है। जब गृह मंत्रालय ने CISF को निर्देश दिया कि वे बाहर निकलने से पहले अपने बकाया पैसे वसूल लें, तो इसने स्पष्ट कर दिया कि कंपनी बुनियादी भुगतान करने में भी असमर्थ है। यह कदम निजीकरण के रास्ते को और आसान बना सकता है, क्योंकि सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का सरकारी नियंत्रण कम हो रहा है।

"CISF की वापसी यह संकेत देती है कि RINL अब परिचालन लागत वहन करने में असमर्थ है, जो अंततः प्लांट की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डाल सकता है।"

वित्तीय संकट का मुख्य कारण कच्चे माल की उच्च लागत है। जहाँ SAIL और टाटा स्टील जैसे प्रतिस्पर्धी अपनी खदानों से ₹1,500-₹2,000 प्रति टन की दर से अयस्क प्राप्त करते हैं, वहीं RINL को खुले बाजार से ₹5,000-₹7,000 प्रति टन की दर से अयस्क खरीदना पड़ता है। इसके अलावा, विस्तार के लिए लिए गए कर्ज पर सालाना ₹3,400 करोड़ का ब्याज और मूल्यह्रास बोझ बन गया है।

ऐतिहासिक रूप से, यह प्लांट 1960 के दशक के 'विशाखा उक्कू, आंध्रुला हक्कू' आंदोलन की उपज है, जिसमें 32 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। 1982 से CISF इस 20,000 एकड़ के परिसर की सुरक्षा कर रहा था और कई बड़े हादसों, जैसे 2012 के ऑक्सीजन प्लांट विस्फोट में जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

विशेषता CISF (अर्धसैनिक बल) निजी सुरक्षा एजेंसियां
कानूनी शक्तियां बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी का अधिकार सीमित कानूनी शक्तियां
लागत उच्च (₹150-200 करोड़ वार्षिक) तुलनात्मक रूप से कम
प्रशिक्षण उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण बुनियादी सुरक्षा प्रशिक्षण
क्या आप जानते हैं?: विशाखापट्टनम स्टील प्लांट की स्थापना के पीछे का आंदोलन इतना तीव्र था कि इसे आंध्र प्रदेश के औद्योगिक इतिहास का सबसे बड़ा जन-संघर्ष माना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. CISF विशाखापट्टनम स्टील प्लांट क्यों छोड़ रहा है?
मुख्य कारण RINL का गंभीर वित्तीय संकट और कार्यशील पूंजी की कमी है, जिससे वह CISF की सेवाओं का भुगतान करने में असमर्थ है।

2. क्या निजी सुरक्षा एजेंसियां CISF की जगह ले पाएंगी?
लागत तो कम होगी, लेकिन निजी एजेंसियों के पास CISF जैसी वैधानिक शक्तियां (गिरफ्तारी और तलाशी) नहीं होती हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।