6 करोड़ के इनामी माओवादी नेता मालोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने हथियार छोड़कर अब गोंडवाना विश्वविद्यालय में जनजातीय अधिकारों के लिए काम करना शुरू कर दिया है। उनका यह परिवर्तन महाराष्ट्र में माओवाद के पतन का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
- 6 करोड़ के इनामी माओवादी नेता भूपति ने महाराष्ट्र पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
- वह अब गोंडवाना विश्वविद्यालय में ग्राम सभा क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण केंद्र के समन्वयक बने हैं।
- उनका मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों, विशेषकर PESA कानून के प्रति जागरूक करना है।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक ऐसा परिवर्तन देखा जा रहा है जो न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर भी है। मालोजुला वेणुगोपाल राव, जिन्हें दुनिया 'भूपति' के नाम से जानती थी, जो कभी प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के पोलिट ब्यूरो के शीर्ष सदस्य थे, अब एक पूरी तरह से अलग जीवन जी रहे हैं। एक समय था जब उन पर 6 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और छह राज्यों की पुलिस उनका पीछा कर रही थी, लेकिन आज वह गोंडवाना विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
भूपति का यह सफर केवल एक व्यक्ति का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र में माओवादी आंदोलन के कमजोर होने का प्रतीक है। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से लोगों के लिए काम करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा, "हम आदिवासियों के प्रतिनिधि के रूप में व्यवस्था से लड़ रहे थे, लेकिन हथियारों के साथ हम उनकी वास्तविक सेवा नहीं कर सकते थे।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भूपति का आत्मसमर्पण और उनका मुख्यधारा में शामिल होना माओवादी कैडर के बीच एक मनोवैज्ञानिक बदलाव को दर्शाता है। जब एक शीर्ष रणनीतिकार और विचारधारा निर्माता हथियार डाल देता है, तो यह आंदोलन की रीढ़ तोड़ने जैसा होता है। उनका अब ग्राम सभाओं के माध्यम से काम करना यह सुनिश्चित करता है कि संघर्ष की जड़ें, जो भूमि और अधिकारों से जुड़ी हैं, उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाया जाए।
"संघर्ष तब तक बना रहेगा जब तक आदिवासियों को सुरक्षा का अहसास नहीं होता और जब तक उनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस क्रांतिकारी बदलाव नहीं किए जाते।"
गोंडवाना विश्वविद्यालय में समन्वयक के रूप में, भूपति का कार्य क्षेत्र गढ़चिरौली के विभिन्न गांवों में ग्राम सभाओं की कार्यप्रणाली की निगरानी करना और स्थानीय जनजातीय समुदायों को PESA (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर) जैसे वन संबंधी कानूनों के बारे में शिक्षित करना होगा। इसके लिए उन्हें 30,000 रुपये मासिक वजीफा दिया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
माओवादी आंदोलन दशकों से भारत के 'रेड कॉरिडोर' में सक्रिय रहा है। भूपति जैसे नेता, जो दशकों तक सैन्य रणनीतिकार रहे, ने इस आंदोलन को वैचारिक और सामरिक मजबूती प्रदान की थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सरकारी दबाव और आत्मसमर्पण नीतियों के कारण इस आंदोलन में बड़ी गिरावट देखी गई है।
Frequently Asked Questions
1. भूपति का नया पद क्या है?
वह गोंडवाना विश्वविद्यालय के ग्राम सभा क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण केंद्र में समन्वयक हैं।
2. PESA कानून क्या है?
यह 1996 का कानून है जो अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्वशासन के अधिकार देता है।