भारतीय सेना अपनी इन्फैंट्री क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अमेरिकी जावेलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली हासिल करने जा रही है। 15 साल के लंबे इंतजार के बाद, यह सौदा तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन की संभावनाओं के साथ रक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखेगा।
- भारतीय सेना अमेरिकी जावेलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली हासिल करेगी।
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) भारत में इसके सह-उत्पादन की संभावना तलाश रही है।
- जावेलिन की 'फायर-एंड-फॉरगेट' तकनीक सैनिकों की सुरक्षा और सटीकता बढ़ाती है।
- यह सौदा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नई दिल्ली: भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमताओं में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। भारत ने अमेरिकी 'फॉरेन मिलिट्री सेल्स' (FMS) कार्यक्रम के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध जावेलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली प्राप्त करने के लिए एक प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र (LOA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है, जहाँ टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ सटीक और मोबाइल हथियारों की आवश्यकता सर्वोपरि है।
इस अधिग्रहण की सबसे बड़ी विशेषता केवल मिसाइल खरीदना नहीं, बल्कि भारत में इसके स्थानीय निर्माण की संभावना है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और जावेलिन जॉइंट वेंचर ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य भारत में जावेलिन के अंतिम असेंबली और एकीकरण की संभावनाओं को तलाशना है। यह 'मेक इन इंडिया' पहल को रक्षा क्षेत्र में एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा?
जावेलिन की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'फायर-एंड-फॉरगेट' (दागो और भूल जाओ) क्षमता है। पुराने मिसाइल सिस्टम के विपरीत, जिसमें ऑपरेटर को लक्ष्य की ओर मिसाइल का मार्गदर्शन करना पड़ता था, जावेलिन का उपयोग करने वाला सैनिक मिसाइल छोड़ने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकता है। यह आधुनिक युद्धक्षेत्र में सैनिकों की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ मिसाइल छोड़ने के कुछ ही सेकंड बाद हमलावर टीम खुद भी निशाने पर आ सकती है।
जावेलिन की टॉप-अटैक क्षमता टैंकों के सबसे कमजोर हिस्से पर प्रहार करती है, जिससे दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करना आसान हो जाता है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सौदा भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है। हालांकि भारत के पास स्वदेशी MPATGM और इजरायली Spike मिसाइलें हैं, लेकिन जावेलिन की युद्ध-सिद्ध (battle-proven) प्रतिष्ठा, विशेष रूप से यूक्रेन संघर्ष के दौरान, इसे एक अद्वितीय बढ़त प्रदान करती है।
भारत की मिसाइल क्षमता का तुलनात्मक विश्लेषण
| मिसाइल प्रणाली | उत्पत्ति | मुख्य विशेषता | उपयोग का प्रकार |
|---|---|---|---|
| जावेलिन (Javelin) | अमेरिका | फायर-एंड-फॉरगेट, टॉप-अटैक | इन्फैंट्री (कंधे पर रखकर) |
| MPATGM | भारत (DRDO) | स्वदेशी तकनीक | इन्फैंट्री (विकासशील) |
| नाग (Nag) | भारत (DRDO) | भारी मारक क्षमता | व्हीकल/हेलीकॉप्टर आधारित |
| स्पाइक (Spike) | इजरायल | सटीक निशाना | आपातकालीन आवश्यकता |
यह अधिग्रहण भारत की बहु-डोमेन निवारण (multi-domain deterrence) क्षमताओं को मजबूत करेगा। जहाँ नाग मिसाइल परिवार भारी टैंकों और हेलीकॉप्टर से संचालित भूमिकाओं के लिए है, वहीं जावेलिन छोटे समूहों द्वारा स्वतंत्र रूप से संचालित किए जाने वाले हल्के और पोर्टेबल हथियारों की जरूरत को पूरा करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जावेलिन मिसाइल को भारत में आने में इतना समय क्यों लगा?
तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन को लेकर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद थे, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है।
2. क्या भारत में जावेलिन का निर्माण होगा?
हाँ, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड भारत में इसके सह-उत्पादन और असेंबली की संभावनाओं पर काम कर रही है।