केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह तमिलनाडु के इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों के लिए खाली पड़ी NEET-SS सीटें वापस करने के लिए तैयार है। यह निर्णय उन डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत है जो कट-ऑफ कम होने का इंतजार कर रहे थे।

  • केंद्र सरकार तमिलनाडु के इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए खाली NEET-SS सीटें वापस करने को तैयार है।
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा हस्तांतरित 152 सीटों में से लगभग 40 सीटें खाली रह गई थीं।
  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कट-ऑफ (qualifying percentile) कम करने की संभावना जताई गई है।
  • तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इन सीटों की वापसी की मांग की थी।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह तमिलनाडु के इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों के लिए खाली पड़ी National Eligibility-cum-Entrance Test-Super Speciality (NEET-SS) सीटें वापस करने के लिए तैयार है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से पेश हुई अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने यह महत्वपूर्ण जानकारी दी।

मामले की पृष्ठभूमि में, तमिलनाडु सरकार ने इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए आरक्षित 152 सीटों को अखिल भारतीय कोटा (All India Quota) में स्थानांतरित कर दिया था। हालांकि, केंद्र ने अदालत में बताया कि इन हस्तांतरित सीटों में से लगभग 40 सीटें अभी भी रिक्त हैं। यह मामला उन डॉक्टरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं और सुपर स्पेशलिटी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल सीटों के आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के आरक्षण नीति और इन-सर्विस डॉक्टरों के करियर विकास के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि कट-ऑफ में कमी की जाती है, तो यह उन सैकड़ों डॉक्टरों को अवसर प्रदान करेगा जो वर्तमान मानदंडों के कारण पीछे रह गए थे।

यह कदम राज्य के चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

याचिकाकर्ता, तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने तर्क दिया कि राज्य को ये सीटें तुरंत वापस करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग 111 उम्मीदवार कट-ऑफ (qualifying percentile) में कमी का इंतजार कर रहे हैं। एसोसिएशन का आरोप था कि इन-सर्विस डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटों का अखिल भारतीय कोटा में 'समयपूर्व डायवर्जन' किया गया था।

तमिलनाडु ने शैक्षणिक वर्ष 2025-2026 के लिए इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए 219 सुपर स्पेशलिटी सीटें निर्धारित की थीं। काउंसलिंग के दो दौर के बाद, केवल 68 उम्मीदवारों ने ज्वाइन किया, जिससे 152 सीटें खाली रह गईं। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले सत्रों की परंपरा के अनुसार, कट-ऑफ में ढील दिए जाने पर ये सीटें भरी जा सकती हैं।

Did You Know?: NEET-SS परीक्षा उन डॉक्टरों के लिए आयोजित की जाती है जो पहले से ही एमबीबीएस और एमडी/एमएस कर चुके हैं और अब सुपर-स्पेशलाइजेशन में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं।

Frequently Asked Questions

1. खाली सीटें किसे वापस की जाएंगी?
ये सीटें तमिलनाडु के इन-सर्विस सरकारी डॉक्टरों को वापस की जाएंगी।

2. अगला कदम क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है, जिसमें केंद्र सरकार कट-ऑफ में कमी की सीमा बताएगी।