NHRC विशेष मॉनिटर गोपी शंकर मदुरई ने केरल सरकार से जेंडर नॉन-कंफॉर्मिंग बच्चों (GNCC) के प्रति अधिक संवेदनशील होने और उनके लिए विशेष स्वास्थ्य एवं वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
- जेंडर नॉन-कंफॉर्मिंग बच्चों को 'ट्रांसजेंडर' लेबल करने के बजाय 'सेक्स डेवलपमेंट' के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
- स्वास्थ्य विभाग को इन बच्चों के जन्म का अलग से पंजीकरण करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।
- GNCC बच्चों के लिए वित्तीय सहायता, विशेष आश्रय गृह और जेनेटिक काउंसलिंग की आवश्यकता है।
तिरुवनंतपुरम: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के ट्रांसजेंडर और LGBT अधिकारों के लिए विशेष मॉनिटर, गोपी शंकर मदुरई ने केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में जेंडर नॉन-कंफॉर्मिंग बच्चों (GNCC) की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
गोपी शंकर ने एक महत्वपूर्ण तर्क दिया कि समाज और प्रशासन को इन बच्चों को सीधे 'ट्रांसजेंडर' के रूप में लेबल करने के बजाय, उन्हें 'सेक्स डेवलपमेंट में अंतर' (differences of sex development) के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सूक्ष्म अंतर को समझना बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के विभिन्न राज्यों में लिंग पहचान से जुड़े कानूनी और सामाजिक ढांचे अभी भी अपूर्ण हैं। केरल जैसे उच्च साक्षरता वाले राज्य में भी, यदि जन्म पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में स्पष्टता नहीं है, तो यह बच्चों के भविष्य के नागरिक अधिकारों को खतरे में डाल सकता है।
जेंडर नॉन-कंफॉर्मिंग बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है जिसे कानूनी दिशा-निर्देशों के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए।
मदुरई ने सुझाव दिया कि केरल के स्वास्थ्य विभाग को इन बच्चों के जन्म का अलग से पंजीकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि इन बच्चों को विशेष वित्तीय सहायता, सुरक्षित आश्रय गृह और वैज्ञानिक जेनेटिक काउंसलिंग प्रदान की जानी चाहिए ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान मिल सके।
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गोपी शंकर के प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। आयोग की कार्यवाहक अध्यक्षा सिसीली जोसेफ और अन्य सदस्यों ने आश्वासन दिया कि जहाँ भी संभव होगा, इन संवेदनशील क्षेत्रों में ठोस और समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
Frequently Asked Questions
1. जेंडर नॉन-कंफॉर्मिंग बच्चों (GNCC) से क्या तात्पर्य है?
ये वे बच्चे हैं जिनकी लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित पारंपरिक पुरुष या महिला मानदंडों से भिन्न होती है।
2. गोपी शंकर मदुरई ने क्या मुख्य मांग रखी है?
उन्होंने विशेष स्वास्थ्य सहायता, अलग जन्म पंजीकरण और जेनेटिक काउंसलिंग की मांग की है।