राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मेटा के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने सरकार और दिल्ली पुलिस से इस गंभीर मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

  • NHRC ने मेटा (Meta) के विज्ञापनों में बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रचार के आरोपों पर संज्ञान लिया है।
  • आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और MeitY से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
  • जांच का मुख्य केंद्र POCSO अधिनियम की धारा 19 का अनुपालन और विज्ञापनों की समीक्षा प्रक्रिया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक अत्यंत गंभीर मामले में हस्तक्षेप किया है। आयोग ने उन मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि Meta Platforms Inc. के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'पेड विज्ञापन' बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) तक पहुंच को बढ़ावा दे रहे हैं।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, इन विज्ञापनों में आपत्तिजनक शब्दों जैसे "rape video" और "child video" का उपयोग किया गया था। ये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को ऐसे मैसेंजर चैनलों पर भेज रहे थे जहाँ इस प्रकार की अवैध सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये विज्ञापन मेटा के अपने 'रिव्यू मैकेनिज्म' से होकर गुजरे और शिकायत दर्ज होने के बावजूद भी सक्रिय रहे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि यह डिजिटल सुरक्षा और बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला है। यदि सोशल मीडिया दिग्गज अपने स्वयं के एल्गोरिदम और विज्ञापन समीक्षा तंत्र को नियंत्रित करने में विफल रहते हैं, तो यह संगठित अपराध और बच्चों के शोषण के लिए एक सुरक्षित गलियारा बना सकता है।

यह मामला डिजिटल मध्यस्थों (Intermediaries) की जवाबदेही और POCSO अधिनियम के तहत उनकी अनिवार्य रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

NHRC ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और दिल्ली पुलिस आयुक्त को दो सप्ताह के भीतर बिंदुवार रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। आयोग ने विशेष रूप से पूछा है कि क्या MeitY ने POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 19 का अनुपालन सुनिश्चित किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कानून लगातार सख्त हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और POCSO अधिनियम के तहत, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपराधों की रिपोर्ट करना भी अनिवार्य है। हाल के वर्षों में, डीपफेक और एआई-जनित सामग्री ने इन चुनौतियों को और अधिक जटिल बना दिया है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' मामले का भी हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि आईटी अधिनियम की धारा 79 किसी भी प्लेटफॉर्म को POCSO अधिनियम के तहत उनके कानूनी दायित्वों से मुक्त नहीं करती है।

Did You Know?: POCSO अधिनियम की धारा 19 के तहत, किसी भी यौन अपराध की जानकारी होने पर उसे तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

Frequently Asked Questions

1. NHRC ने मेटा के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
NHRC ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित सरकारी मंत्रालयों और दिल्ली पुलिस से इस पर विस्तृत रिपोर्ट और कार्रवाई की मांग की है।

2. विज्ञापन में क्या समस्या थी?
विज्ञापन आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग कर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बेचने वाले चैनलों का लिंक दे रहे थे।