कुर्दा जिला और सत्र न्यायालय ने नेवेन पटनायक और वी.के. पंडियन के खिलाफ दायर शिकायत को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने RTI से प्राप्त कोई दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया।

  • किसी भी ठोस सबूत की कमी के कारण शिकायत खारिज
  • RTI सामग्री कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुई
  • कानूनी प्रक्रिया में सेक्शन 173(4) का उल्लंघन

कुर्दा जिला एवं सत्र न्यायालय ने 2 सितंबर को सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर चरण मोहनती द्वारा दायर आपराधिक संशोधन याचिका को खारिज कर दिया। यह निर्णय 25 मार्च को भुवनेश्वर के उप-न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) के आदेश को बरकरार रखता है, जिसमें पटनायक और पंडियन के खिलाफ की गई शिकायत को अस्वीकार किया गया था।

जज बिरंची नारायण मोहनती ने 14 पृष्ठों के आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने गवाहों से RTI के माध्यम से प्राप्त "एक भी कागज़ की टुकड़ी" अदालत में नहीं पेश की, जिससे यह सिद्ध नहीं हो सका कि कोई अपराध हुआ है या दोनों नेताओं की भागीदारी है।

शिकायत में कहा गया था कि नेवेन पटनायक के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान लगभग 300 हेलीकॉप्टर यात्राओं के लिए ₹500 करोड़ से अधिक सार्वजनिक खर्च किया गया, और यह खर्च खनन मालिकों, जमीन माफिया, ठेकेदारों और अन्य निजी स्रोतों से उठाया गया। अदालत ने यह नहीं माना कि इन खर्चों को वैध साबित किया गया है, बल्कि यह कहा कि प्रस्तुत सामग्री अपर्याप्त है।

सुधीर चरण मोहनती ने 14 अगस्त 2024 को पहली FIR दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने पूछा था कि यदि सरकारी मंजूरी नहीं थी तो खर्च कौन उठा रहा था। लेकिन सत्र न्यायालय ने पाया कि FIR, डीसीपी को भेजे गए रिपोर्ट और शिकायत में असंगतियां हैं, और मोहनती ने सेक्शन 173(4) के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि शिकायत में उल्लिखित अपराध भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम (BNSS) की सेक्शन 33 के दायरे में नहीं आते, जिससे कानूनी आधार कमजोर हो गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the dismissal highlights systemic challenges in holding high‑ranking officials accountable when evidence is primarily based on RTI disclosures rather than hard documents.

Legal experts caution that mere allegations without documentary evidence rarely lead to convictions.
Did You Know?: ओडिशा में पहले भी हेलीकॉप्टर उपयोग के खर्चों को लेकर सार्वजनिक बहस हुई है, लेकिन कोई स्पष्ट ऑडिट रिपोर्ट नहीं मिली।

Frequently Asked Questions

क्या इस मामले में कोई आपराधिक प्रक्रिया शुरू होगी? वर्तमान में अदालत ने याचिका खारिज कर दी है, इसलिए आगे की आपराधिक प्रक्रिया के लिए नई साक्ष्य आवश्यक होंगे।

हेलीकॉप्टर यात्राओं का वास्तविक खर्च कितना था? शिकायतकर्ता ने ₹500 करोड़ का अनुमान लगाया था, लेकिन कोई आधिकारिक लेखा‑जांच या प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।