पट्टुकोट्टई से कराईकुडी के बीच ओवरहेड विद्युतीकरण (OHE) का काम पूरा हो गया है और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफल ट्रायल रन किया गया है। 9 सितंबर को होने वाले आधिकारिक निरीक्षण के बाद इस मार्ग पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें शुरू हो सकेंगी।
- पट्टुकोट्टई-कराइकुडी के बीच 70 किमी के खंड का विद्युतीकरण पूरा हुआ।
- इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव ने 75 किमी/घंटा की अधिकतम गति से सफल ट्रायल रन किया।
- 9 सितंबर को मुख्य प्रधान विद्युत इंजीनियर द्वारा अनिवार्य निरीक्षण निर्धारित।
- इस मार्ग पर वर्तमान में डीजल इंजन का उपयोग हो रहा है।
दक्षिण रेलवे के तिरुचि डिवीजन के अंतर्गत आने वाले पट्टुकोट्टई-कराइकुडी ब्रॉड गेज खंड में ओवरहेड विद्युतीकरण (OHE) परियोजना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर चुकी है। बुधवार देर रात, लगभग 70 किलोमीटर लंबे इस खंड पर एक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का सफल ट्रायल रन आयोजित किया गया, जो क्षेत्र के रेल बुनियादी ढांचे में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
इस परीक्षण के दौरान, साउदर्न रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन और तिरुचि रेलवे डिवीजन के इंजीनियरों की एक तकनीकी टीम इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में सवार होकर दोनों दिशाओं में यात्रा कर रही थी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह परीक्षण मुख्य प्रधान विद्युत इंजीनियर (Southern Railway) और सरकारी विद्युत निरीक्षक (EIG) से मंजूरी मिलने के बाद किया गया।
तकनीकी विवरण और गति परीक्षण
परीक्षण के दौरान, इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बुधवार रात 10:28 बजे पट्टुकोट्टई स्टेशन से रवाना हुआ और रात 11:58 बजे कराईकुडी पहुंचा। वापसी में, यह रात 00:12 बजे कराईकुडी से चला और तड़के 1:40 बजे पट्टुकोट्टई वापस आया। इस दौरान ट्रेन ने 75 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति हासिल की, जो ट्रैक की स्थिरता और विद्युतीकरण की गुणवत्ता को प्रमाणित करती है।
विद्युतीकरण के इस चरण के पूरा होने से दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क में ऊर्जा दक्षता और परिचालन गति में क्रांतिकारी सुधार आने की उम्मीद है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पट्टुकोट्टई-कराइकुडी खंड का विद्युतीकरण तिरुचि रेलवे डिवीजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस डिवीजन का अंतिम ब्रॉड गेज खंड है जिसे विद्युतीकृत किया जाना था। इससे न केवल परिचालन लागत में कमी आएगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी।
वर्तमान में, इस मार्ग पर यात्री और मालगाड़ियाँ डीजल इंजनों द्वारा संचालित की जाती हैं। 9 सितंबर को होने वाले अनिवार्य निरीक्षण के बाद, जब मुख्य प्रधान विद्युत इंजीनियर और सरकारी विद्युत निरीक्षक से हरी झंडी मिल जाएगी, तब इस खंड पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें आधिकारिक रूप से दौड़ना शुरू कर देंगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
साउदर्न रेलवे कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन को तिरुवारुर-थिरुथुरैपुंदी-पट्टुकोट्टई-अरंथंगी-कराइकुडी के लगभग 150 किमी लंबे खंड को चरणों में विद्युतीकृत करने का काम सौंपा गया था। परियोजना के तहत दो महत्वपूर्ण ट्रैक्शन सबस्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं: एक थिरुथुरैपुंदी में और दूसरा पट्टुकोट्टई में।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पट्टुकोट्टई-कराइकुडी खंड पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें कब शुरू होंगी?
उत्तर: 9 सितंबर को होने वाले आधिकारिक निरीक्षण और मंजूरी के बाद इनका परिचालन शुरू होने की संभावना है।
प्रश्न 2: इस परियोजना का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, परिचालन लागत घटेगी और पर्यावरण के अनुकूल रेल यात्रा सुनिश्चित होगी।