श्रीकाकुलम के एक सेवानिवृत्त वनस्पति विज्ञान प्रोफेसर, निक्कू अपन्ना ने वाल्मीकि रामायण की जटिलता को दूर करने के लिए इसे सरल तेलुगु में फिर से लिखा है। उनकी नई पुस्तक 'ना रामुडु' का उद्देश्य नई पीढ़ी को भगवान राम के मूल्यों से जोड़ना है।
- 84 वर्षीय निक्कू अपन्ना ने सरल तेलुगु में 'ना रामुडु' नामक पुस्तक लिखी है।
- इस पुस्तक का उद्देश्य बच्चों को वाल्मीकि रामायण के कठिन छंदों के बिना महाकाव्य समझाना है।
- प्रोफेसर अपन्ना ने 35 वर्षों तक लोयोला कॉलेज में वनस्पति विज्ञान पढ़ाया।
श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश: उम्र केवल एक संख्या है, और निक्कू अपन्ना ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। 84 वर्ष की आयु में, श्रीकाकुलम जिले के बुदिती गांव के एक सेवानिवृत्त वनस्पति विज्ञान प्रोफेसर ने एक ऐसा कार्य किया है जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के जटिल श्लोकों और कठिन भाषा को सरल बनाते हुए, बच्चों के लिए एक सुलभ संस्करण तैयार किया है।
उनकी नई पुस्तक, जिसका शीर्षक 'ना रामुडु' है, रामायण के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करती है। वाल्मीकि रामायण में 24,000 श्लोक और सात कांड हैं, जिन्हें समझना आज की पीढ़ी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अपन्ना का लक्ष्य इस महाकाव्य के सार को इतनी सरलता से प्रस्तुत करना है कि बच्चे इसे आसानी से पढ़ सकें और भगवान राम के जीवन से मिलने वाली नैतिकता और मूल्यों को आत्मसात कर सकें।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए भाषा का सरलीकरण एक महत्वपूर्ण उपकरण है। जब शास्त्रीय ग्रंथ बहुत कठिन हो जाते हैं, तो युवा पीढ़ी उनसे कट जाती है। निक्कू अपन्ना का प्रयास न केवल साहित्य का संरक्षण है, बल्कि यह नैतिक शिक्षा को आधुनिक संदर्भ में सुलभ बनाने की एक सामाजिक पहल भी है।
नई पीढ़ी को सही रास्ते पर लाने के लिए उन्हें अपने ही जीवन की भाषा में राम के मूल्यों को पढ़ने की आवश्यकता है।
प्रोफेसर अपन्ना का शैक्षणिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने लोयोला कॉलेज, विजयवाड़ा में लगभग 35 वर्षों तक वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में सेवा दी। सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने लेखन को अपना जुनून बना लिया। 'ना रामुडु' से पहले, वे 'भावा तरंगिणी', 'गेया सुधबिंदुवुलु', 'व्यास मंजरी' और 'ना जन्मभूमि-बुदिती' जैसी पुस्तकें लिख चुके हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रामायण, जिसे महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित माना जाता है, भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ है। इसके सात कांड (बाल कांड से उत्तर कांड तक) जीवन के विभिन्न चरणों और कर्तव्यों का वर्णन करते हैं। हालांकि, शास्त्रीय संस्कृत और प्राचीन तेलुगु के उच्च स्तर के कारण, समकालीन बच्चों के लिए इसे समझना कठिन होता जा रहा है।
इस पुस्तक के विमोचन के दौरान, पूर्व विधायक गुंडा लक्ष्मी देवी और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष पी. जगन मोहन राव ने अपन्ना के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि 84 वर्ष की आयु में ऐसा कार्य करना प्रेरणादायक है और यह साबित करता है कि सीखने और योगदान देने की कोई उम्र नहीं होती।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'ना रामुडु' पुस्तक की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: यह पुस्तक वाल्मीकि रामायण की जटिलता को हटाकर सरल तेलुगु में लिखी गई है ताकि बच्चे इसे आसानी से समझ सकें।
प्रश्न 2: निक्कू अपन्ना कौन हैं?
उत्तर: वे श्रीकाकुलम के बुदिती गांव के रहने वाले एक सेवानिवृत्त वनस्पति विज्ञान प्रोफेसर हैं, जिन्होंने लोयोला कॉलेज में 35 वर्षों तक पढ़ाया है।