चेन्नई के ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज से सचिवालय को स्थानांतरित करने की योजना दशकों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। एमजीआर से लेकर करुणानिधि और जयललिता तक, हर सरकार ने अपने तरीके से इस पर विचार किया।

  • फोर्ट सेंट जॉर्ज में विधानसभा और सचिवालय का अस्तित्व औपनिवेशिक काल से है।
  • एमजीआर सरकार ने 1983 में नए ढांचे का प्रस्ताव दिया था, जिसे बाद में छोड़ दिया गया।
  • जयललिता ने ममलपुरम और क्वीन मैरी कॉलेज जैसे स्थानों पर विचार किया था।
  • करुणानिधि ने ओमांडुरार एस्टेट में नया परिसर बनाया, जिसे बाद में विरोध का सामना करना पड़ा।

तमिलनाडु की 102 साल पुरानी विधानसभा लंबे समय से चेन्नई के ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज में अपनी बैठकें आयोजित कर रही है। यह औपनिवेशिक युग की एक महत्वपूर्ण विरासत है, जो राज्य सरकार की शक्ति का केंद्र रही है। हालांकि, बढ़ते प्रशासनिक कार्यों और स्थान की कमी के कारण, इस परिसर को स्थानांतरित करने की चर्चा पिछले चार दशकों से लगातार चल रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और एमजीआर का प्रस्ताव

इस विवाद की जड़ें 1980 के दशक में मिलती हैं। मई 1983 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की सरकार ने सचिवालय के लिए एक नया ढांचा बनाने का आदेश जारी किया था। उस समय सरकार की बढ़ती कल्याणकारी योजनाओं के लिए फोर्ट सेंट जॉर्ज में पर्याप्त जगह नहीं थी। हालांकि, राजनीतिक बदलावों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

दो दशक बाद, एमजीआर की उत्तराधिकारी जे. जयललिता ने इस विचार को नया मोड़ दिया। उन्होंने ममलपुरम के पास एक 'प्रशासनिक शहर' बनाने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि वर्तमान सचिवालय परिसर मानव निवास के लिए अनुपयुक्त है और इसका एक बड़ा हिस्सा रक्षा बलों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियंत्रण में है।

क्वीन मैरी कॉलेज विवाद और राजनीतिक टकराव

जयललिता ने 2003 में क्वीन मैरी कॉलेज परिसर को नए सचिवालय के लिए प्रस्तावित किया। उन्होंने इसकी तुलना बेंगलुरु के विधान सौधा और दिल्ली के विज्ञान भवन की भव्यता से की। लेकिन यह प्रस्ताव भारी विरोध के घेरे में आ गया। छात्रों, शिक्षाविदों और विरासत प्रेमियों ने कॉलेज के भवनों को गिराने के खिलाफ प्रदर्शन किया। उस समय विपक्ष के नेता रहे वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी छात्रों का समर्थन किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा।

करुणानिधि का दृष्टिकोण और ओमांडुरार एस्टेट

जब एम.के. करुणानिधि मई 2006 में पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने ओमांडुरार गवर्नमेंट एस्टेट को नए सचिवालय के लिए चुना। 2008 में इसकी नींव रखी गई और 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका उद्घाटन किया। हालांकि, जयललिता ने इस नए परिसर का कड़ा विरोध किया और दावा किया कि सत्ता में वापसी करने पर वे फिर से फोर्ट सेंट जॉर्ज को ही शक्ति का केंद्र बनाएंगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक इमारत का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की राजनीतिक पहचान और विरासत के संरक्षण के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। हर नई सरकार अपनी प्रशासनिक दृष्टि को भौतिक रूप देने का प्रयास करती है, जिससे ऐतिहासिक स्मारकों और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच टकराव पैदा होता है।

सचिवालय का स्थानांतरण केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक विरासत और आधुनिक प्रशासनिक दक्षता के बीच का संतुलन है।
Did You Know?: कोरोनो महामारी के दौरान, विधानसभा की बैठकें नए बने कलाइवार अरंगम में आयोजित की गई थीं जब फोर्ट सेंट जॉर्ज का उपयोग सीमित था।

Frequently Asked Questions

1. फोर्ट सेंट जॉर्ज को क्यों स्थानांतरित करने की मांग की जा रही है?
स्थान की कमी, रक्षा बलों का नियंत्रण और आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव इसके मुख्य कारण हैं।

2. ओमांडुरार एस्टेट का क्या महत्व है?
यह करुणानिधि द्वारा निर्मित एक आधुनिक सचिवालय परिसर है, जिसे बाद में राजनीतिक विवादों का सामना करना पड़ा।