चेन्नई के शोलिंगनल्लूर में 178 परिवार तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड (TNHB) से अपने अधिग्रहित भूखंडों को वापस करने या उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। 1990 में खरीदे गए इन भूखंडों का उपयोग दशकों बाद भी नहीं किया गया है, जिससे परिवारों में भारी आक्रोश है।
- 178 परिवार 1990 से अपने भूखंडों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
- TNHB द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है।
- परिवारों ने खाली पड़े भूखंडों के बदले नए फ्लैट या वैकल्पिक जमीन की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट ने भी बोर्ड को उचित मुआवजा या वैकल्पिक प्लॉट देने का निर्देश दिया है।
चेन्नई के तेजी से विकसित हो रहे इलाके शोलिंगनल्लूर में एक गंभीर भूमि विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 178 परिवार तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड (TNHB) के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, जिन्होंने 1990 के दशक में 'टेस्को लेआउट' में आवासीय भूखंड खरीदे थे। इन परिवारों का आरोप है कि TNHB ने उनके भूखंडों का अधिग्रहण तो कर लिया, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी उस जमीन का उपयोग नहीं किया गया है।
विवाद की जड़ 1991 का वह निर्णय है जब TNHB ने शोलिंगनल्लूर फेज III नेबरहुड हाउसिंग स्कीम के लिए 13.89 एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना जारी की थी। पीड़ित परिवारों, जिनमें पुगज़ेंधी एस. और पी. एंथोनीसामी शामिल हैं, का कहना है कि उन्होंने 1990 में मात्र ₹10,000 में जमीन खरीदी थी। अब 34 साल बाद, बोर्ड ने मुआवजे के रूप में प्रति ग्राउंड केवल ₹12,257 (ब्याज सहित) देने का प्रस्ताव रखा है, जो वर्तमान बाजार दर के सामने नगण्य है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल मुआवजे का नहीं, बल्कि सरकारी प्रशासनिक विफलता और भूमि उपयोग की नीतियों का है। जब सरकारें बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण करती हैं, तो उन भूखंडों का समयबद्ध उपयोग न करना नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन है। शोलिंगनल्लूर जैसे प्राइम रियल एस्टेट क्षेत्र में ऐसी विफलता भविष्य के बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट्स के लिए एक चेतावनी है।
"सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई खाली पड़ी जमीन का वर्षों तक उपयोग न करना, मूल मालिकों के साथ अन्याय है और यह शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाता है।"
परिवारों की मांग स्पष्ट है: या तो उन्हें उनके मूल भूखंड वापस दिए जाएं, या फिर TNHB द्वारा उसी क्षेत्र में बनाए गए 1000 अपार्टमेंट्स में से कोई एक फ्लैट आवंटित किया जाए। परिवारों का तर्क है कि चूंकि कई फ्लैट खाली पड़े हैं, इसलिए उन्हें वहां बसाना एक न्यायपूर्ण समाधान हो सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1990 के दशक की शुरुआत में, चेन्नई के बाहरी इलाकों में आवासीय विकास के लिए कई लेआउट बनाए गए थे। तकनीकी शिक्षा निदेशालय बिल्डिंग सोसाइटी के माध्यम से खरीदे गए ये भूखंड मध्यम वर्ग के सपनों का हिस्सा थे। हालांकि, अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रशासनिक देरी के कारण, कई भूखंडों का पंजीकरण 2010 में ही हुआ, जिससे कानूनी पेचीदगियां और बढ़ गईं।
Frequently Asked Questions
1. परिवार मुख्य रूप से क्या मांग कर रहे हैं?
परिवार अपने मूल भूखंडों की वापसी, वैकल्पिक प्लॉट, या TNHB की मौजूदा हाउसिंग परियोजना में फ्लैट की मांग कर रहे हैं।
2. मुआवजे पर विवाद क्यों है?
मुआवजा 1990 की कीमतों और बहुत कम ब्याज दर पर आधारित है, जो शोलिंगनल्लूर के वर्तमान अत्यधिक बाजार मूल्य से मेल नहीं खाता।